देवर की आग और भाभी की टूटी सील
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एक छोटे से शहर में रहने वाले राजेश और उनकी पत्नी प्रिया का विवाह को तीन साल हो चुके थे। राजेश एक अच्छी नौकरी करने वाला सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, लेकिन उनकी शादीशुदा जिंदगी में एक गहरा राज छिपा हुआ था।
राजेश नपुंसक थे। शादी के बाद पहली रात से ही उन्हें पता चल गया था कि वे शारीरिक रूप से संभोग करने में असमर्थ हैं। प्रिया ने शुरुआत में बहुत समझदारी से सहन किया, लेकिन समय के साथ उसकी जवानी की आग और भावनात्मक भूख उसे अंदर ही अंदर तोड़ रही थी। वह 26 साल की थी, गोरी, नाजुक काया वाली, लेकिन उसकी छाती भरी हुई और कमर पतली थी। घर में उसका देवर, 22 साल का विक्रम, कॉलेज से अभी लौटा था। विक्रम हट्टा-कट्टा, खेलकूद में रुचि रखने वाला जवान था, जिसकी नजरें अक्सर भाभी पर टिक जाती थीं।
सब कुछ सामान्य लगता था, लेकिन एक शाम को सब बदल गया। राजेश ऑफिस के काम से दिल्ली गए हुए थे, दो दिन बाद लौटने वाले थे। प्रिया रसोई में खाना बना रही थी। विक्रम जिम से लौटकर शर्ट उतारे हुए आया। उसकी पसीने से तर शरीर देखकर प्रिया का दिल अचानक धड़क उठा। वह खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन विक्रम ने नोटिस कर लिया।
“भाभी, आजकल आप थोड़ी परेशान लग रही हैं। क्या बात है?” विक्रम ने पूछा, पानी का ग्लास लेते हुए। उसकी आवाज में सच्ची चिंता थी, लेकिन आंखों में कुछ और था।
प्रिया ने मुड़कर देखा। “कुछ नहीं विक्रम, बस थकान है।” उसकी आवाज कांपी।
विक्रम पास आ गया। “भाभी, मैं आपका छोटा देवर हूं। आप मुझसे कुछ भी छिपा सकती हैं? भैया तो अक्सर बाहर रहते हैं। अगर कोई समस्या है तो बताओ।”
प्रिया की आंखें नम हो गईं। सालों की दबी हुई पीड़ा बाहर आने लगी। “विक्रम… तुम्हारे भैया… वो… वो मुझे कभी छूते तक नहीं।” उसने फुसफुसाते हुए कहा, “वे नपुंसक हैं। शादी के बाद से ही… मैं क्या करूं? मैं औरत हूं, मेरी उम्र है, मेरी इच्छाएं हैं।”
विक्रम स्तब्ध रह गया। उसने कभी सोचा भी नहीं था। लेकिन अंदर से उसकी इच्छा जाग उठी। “भाभी… मैं जानता था कि कुछ गड़बड़ है। आप इतनी सुंदर हो, फिर भी हमेशा उदास।” उसने धीरे से प्रिया का हाथ पकड़ा। “अगर आप चाहो तो… मैं आपकी हर इच्छा पूरी कर सकता हूं।”
प्रिया ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन नहीं छुड़ा पाई। “विक्रम, ये गलत है। तुम मेरे देवर हो।”
“गलत तभी है जब दोनों खुश न हों, भाभी।” विक्रम ने उसे अपनी ओर खींचा। “मैं आपको वो खुशी दे सकता हूं जो भैया नहीं दे पाए। आपकी वो टाइट चूत… जो अब तक अछूती है।”
प्रिया का चेहरा लाल हो गया। दिल जोरों से धड़क रहा था। डर, शर्म और इच्छा का मिश्रण था। “विक्रम… मत करो ऐसा… लेकिन… मैं कितना अकेली हूं।” उसने आंखें बंद कर लीं।
विक्रम ने उसे गले लगाया। दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई। प्रिया ने रोते हुए अपनी सारी दबी हुई इच्छाएं बताईं। विक्रम ने उसे आश्वासन दिया कि वो सब संभाल लेगा। रात गहराते ही हॉल में बैठे दोनों के बीच की दूरी खत्म होती गई। विक्रम ने प्रिया के होंठों पर हल्का किस किया। प्रिया ने विरोध नहीं किया।
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देवर की आग और भाभी की टूटी सील (भाग 2)
विक्रम ने प्रिया को हॉल के बड़े सोफे पर धीरे से लिटा दिया। कमरे में सिर्फ मंद रोशनी थी। प्रिया का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसकी सांसें तेज हो गई थीं। शर्म से उसका चेहरा लाल हो रहा था, लेकिन आंखों में गहरी इच्छा झलक रही थी।
“भाभी… आज मैं तुम्हें वो खुशी दूंगा जो तुम सालों से तरस रही हो,” विक्रम ने फुसफुसाते हुए कहा। उसने प्रिया की साड़ी का पल्लू धीरे-धीरे खींचा। साड़ी का कपड़ा सरकते ही प्रिया की भरी हुई ब्लाउज वाली छाती सामने आई। विक्रम ने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। ब्लाउज खुलते ही सफेद लेस वाली ब्रा दिखी, जिसमें प्रिया के गोल-गोल, भरे हुए स्तन दबे हुए थे।
प्रिया ने आंखें बंद कर लीं और धीमी आवाज में बोली, “विक्रम… धीरे… मैं डर रही हूं।”
विक्रम ने मुस्कुराते हुए ब्रा के हुक पीछे से खोले। ब्रा खुलते ही प्रिया के दोनों बड़े, गोरे स्तन छूटकर बाहर आ गए। उनके गुलाबी निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। विक्रम ने एक स्तन को हाथ में ले लिया और जोर से मसलने लगा। फिर मुंह से निप्पल चूसने लगा। “आह्ह्ह… विक्रम… उम्म्म…” प्रिया के मुंह से अनायास ही सिसकारी निकल गई। उसका शरीर ऐंठने लगा। विक्रम दूसरे स्तन को भी चूसता रहा, कभी-कभी हल्का काट भी लेता। प्रिया की उंगलियां विक्रम के बालों में फंस गईं।
अब विक्रम ने प्रिया की साड़ी पूरी तरह ऊपर उठाई। उसकी मोटी, गोरी जांघें सामने थीं। उसने पेटीकोट की नाडा खोल दिया। पेटीकोट सरकते ही सफेद लेस वाली पैंटी दिखी, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। विक्रम ने पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाया। प्रिया की टाइट, बिना बाल वाली, गुलाबी चूत पूरी तरह नंगी हो गई। उसकी चूत की सील अभी तक अटूट थी, बहुत टाइट और छोटी दिख रही थी।
“भाभी… कितनी टाइट और सुंदर है तुम्हारी चूत,” विक्रम ने कहा और अपनी उंगली से उसकी चूत को सहलाने लगा। प्रिया ने कमर उठाकर प्रतिक्रिया दी। “आह्ह… अंदर डालो… धीरे…” विक्रम ने एक उंगली अंदर डाली, फिर दो। फिंगरिंग तेज होती गई। प्रिया की चूत से रस निकलने लगा। उसका चेहरा आनंद से लाल हो रहा था, आंखें अर्ध-बंद, होंठ कांप रहे थे।
विक्रम ने अब अपनी शर्ट और पैंट उतारी। उसका लंबा, मोटा, खड़ा लंड बाहर आ गया। प्रिया ने देखा और चौंक गई, “इतना बड़ा… कैसे जाएगा?”
विक्रम ने प्रिया की जांघें फैलाकर सोफे पर अच्छी तरह पोजीशन लिया। लंड के सिरे को चूत के मुंह पर रगड़ने लगा। फिर धीरे-धीरे दबाव डालते हुए अंदर डालने लगा। “आआआह्ह्ह्ह!!! विक्रम… दर्द हो रहा है… धीरे…” प्रिया ने जोर से चीख मारी। उसकी आंखों से आंसू निकल आए। विक्रम रुका नहीं, धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डालता गया। आखिरकार चूत की सील टूट गई। खून की हल्की धार निकली।
“अब दर्द कम हो जाएगा भाभी…” विक्रम ने कहा और धीमी गति से चोदने लगा। प्रिया के चेहरे पर दर्द और आनंद का मिश्रण था। धीरे-धीरे वह भी कमर हिलाने लगी। विक्रम की गति तेज होती गई। “उम्म्म… आह्ह… और जोर से… विक्रम… फाड़ दो मेरी चूत…” प्रिया अब पूरी तरह लिपट गई थी।
विक्रम ने जोर-जोर से धक्के मारते हुए उसे चोदा। सोफा हिल रहा था। प्रिया की छाती उछल रही थी। दोनों के पसीने एक हो गए। आखिरकार विक्रम ने जोर का धक्का मारकर अंदर ही झड़ दिया। प्रिया भी पहली बार ऑर्गेज्म आई। “आआआह्ह्ह… मैं मर गई… विक्रम!!!”
दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। प्रिया की टाइट चूत अब विक्रम के लंड से भर चुकी थी और उसकी सील टूट चुकी थी।
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देवर की आग और भाभी की टूटी सील (भाग 3)
प्रिया ने विकल्प 2 चुना, और कहानी आगे बढ़ी…
रात भर की थकान के बाद सुबह हुई। राजेश शाम तक लौटने वाले थे। प्रिया ने उठकर विक्रम को जगाया। उसकी आंखों में अब शर्म की जगह प्यास थी। “विक्रम… अभी समय है। चलो शावर में… मैं तुम्हारे साथ नहाना चाहती हूं,” प्रिया ने शरमाते हुए कहा।
दोनों नंगे होकर बाथरूम में गए। विक्रम ने शावर ऑन किया। गर्म पानी उनकी देह पर गिरने लगा। प्रिया की गोरी देह पानी से चमक रही थी। उसके स्तन भारी होकर नीचे लटक रहे थे, निप्पल पानी की वजह से और भी सख्त। विक्रम ने उसे दीवार से सटाकर जोर से किस किया। उनकी जुबानें एक-दूसरे में घुल गईं।
विक्रम ने प्रिया के स्तनों पर साबुन लगाया और जोर-जोर से मलने लगा। “आह्ह्ह… विक्रम… कितना अच्छा लग रहा है…” प्रिया की सिसकारियां बाथरूम में गूंज रही थीं। विक्रम नीचे झुका और उसकी टाइट चूत पर मुंह रखकर चाटने लगा। पानी और प्रिया का रस मिलकर विक्रम के मुंह में जा रहा था। प्रिया ने विक्रम के सिर को अपनी चूत से दबाया, “चूसो… और जोर से… आह्ह्ह!!!”
कुछ देर चाटने के बाद विक्रम खड़ा हो गया। उसका लंड पहले से ही पूरा खड़ा और मोटा हो चुका था। प्रिया ने उसे हाथ से पकड़कर सहलाया। “अब मुझे ऊपर रहने दो… मैं तुम्हें कंट्रोल करना चाहती हूं।”
विक्रम ने शावर के नीचे फर्श पर बैठकर पीठ टिका ली। प्रिया उसके ऊपर चढ़ गई। उसने विक्रम के लंड को अपनी चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे बैठने लगी। “उम्म्म्म… आह्ह्ह… पूरा अंदर जा रहा है…” प्रिया की आंखें बंद थीं, मुंह खुला हुआ था, पानी उसके चेहरे पर बह रहा था। विक्रम के मोटे लंड ने उसकी अभी-अभी टूटी चूत को फिर से फैला दिया।
प्रिया अब पूरी तरह बैठ चुकी थी। विक्रम का पूरा लंड उसके अंदर समा गया था। वह धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। उसके भारी स्तन पानी के साथ उछल-उछलकर विक्रम के चेहरे पर लग रहे थे। विक्रम ने दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़कर मसलते हुए निप्पल चूसने लगा।
“जोर से… विक्रम… मुझे चोदो… आह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चूत!” प्रिया की गति तेज हो गई। अब वह जोर-जोर से कूद रही थी। पानी चारों तरफ छिटक रहा था। विक्रम नीचे से जोरदार धक्के मार रहा था। प्रिया का चेहरा आनंद से विकृत हो रहा था — आंखें उलटी, जीभ बाहर, पसीना और पानी मिलकर बह रहा था।
“मैं आ गई… विक्रम… आह्ह्ह्ह्ह!!!” प्रिया का शरीर सख्त हो गया और वह जोर से झड़ गई। उसकी चूत विक्रम के लंड को भींच रही थी। विक्रम भी कुछ ही देर बाद रुक नहीं पाया। उसने प्रिया की कमर पकड़कर गहराई तक धक्का मारा और पूरा गर्म वीर्य उसके अंदर छोड़ दिया।
दोनों थककर शावर के नीचे ही लिपटे रहे। पानी अभी भी उनके शरीर पर बह रहा था। प्रिया ने विक्रम के सीने पर सिर रखा और फुसफुसाई, “अब मैं तुम्हारी हो गई… जितनी बार चाहो चोदना।”
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देवर की आग और भाभी की टूटी सील (भाग 4)
अगले दिन सुबह राजेश ऑफिस चले गए। उन्होंने कहा, “शाम को लौटूंगा।” दरवाजा बंद होते ही प्रिया ने विक्रम की ओर देखा। दोनों की नजरें मिलीं। कल की चुदाई के बाद प्रिया के मन में शर्म, प्यार, अपराधबोध और गहरी इच्छा का तूफान चल रहा था। वह विक्रम के पास आई, उसके सीने से लिपट गई और फूट-फूटकर रो पड़ी।
“विक्रम… मैं क्या कर रही हूं? तुम मेरे देवर हो… लेकिन तुमने मुझे वो इंसान बना दिया जो मैं कभी नहीं थी। मैं राजेश से प्यार करती हूं, लेकिन वो मुझे कभी औरत नहीं बना पाए। तुमने मुझे जिंदा कर दिया।” प्रिया की आवाज कांप रही थी। आंसू उसके गालों पर बह रहे थे।
विक्रम ने उसे कसकर गले लगाया। “भाभी… प्रिया… मैं भी तुमसे प्यार करने लगा हूं। ये सिर्फ शरीर नहीं, दिल से हो रहा है। मैं तुम्हें कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा। आज पूरा दिन हमारा है। मैं तुम्हें वो प्यार दूंगा जो तुम सालों से तरस रही हो।”
प्रिया ने आंसू पोछे और विक्रम के होंठों को चूम लिया। “आज मुझे पूरी तरह अपनी बना लो… भावनाओं के साथ, धीरे-धीरे… मैं तुम्हारी हूं।”
दोनों सीधे बेडरूम में गए। विक्रम ने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया। आज कोई जल्दबाजी नहीं थी। उसने धीरे-धीरे प्रिया की साड़ी उतारी। हर कपड़े के साथ वो उसके शरीर को चूमता जा रहा था — गर्दन, कंधे, छाती। ब्लाउज खोलते समय उसने ब्रा के ऊपर से ही स्तनों को चूमा। प्रिया की सांसें भारी हो रही थीं। “विक्रम… मुझे बहुत प्यार करो आज…”
ब्रा उतरते ही विक्रम ने दोनों स्तनों को हाथों में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। प्रिया की उंगलियां उसके बालों में फंस गईं। “आह्ह्ह… तुम्हारा मुंह… कितना अच्छा लगता है…” वह भावुक होकर रो रही थी।
फिर विक्रम ने पेटीकोट और पैंटी उतारी। प्रिया की टाइट चूत अब थोड़ी लाल और सूजी हुई थी, लेकिन पूरी तरह गीली। विक्रम ने उसे चाटा, जीभ अंदर डालकर घुमाई। प्रिया की कमर उठ रही थी। “विक्रम… मैं तुमसे बिना नहीं रह सकती… आह्ह्ह…”
प्रिया ने विक्रम को ऊपर खींचा और खुद उसके लंड को मुंह में ले लिया। वह भावुकता से चूस रही थी, कभी-कभी आंसू गिरा रही थी। “ये लंड… अब मेरी जिंदगी है।”
विक्रम ने उसे अपनी गोद में बिठाया। प्रिया ऊपर थी। उसने लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गई। “उम्म्म्म… पूरा अंदर… विक्रम… तुम मुझे भर रहे हो…” दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे। प्रिया धीरे-धीरे हिलने लगी। उसके स्तन विक्रम के मुंह के पास उछल रहे थे।
गति धीरे-धीरे तेज हुई। प्रिया अब जोर से कूद रही थी। “मैं तुमसे प्यार करती हूं विक्रम… भले ही ये गलत हो… आह्ह्ह… और जोर से चोदो मुझे!” विक्रम ने नीचे से धक्के मारे। कमरे में चुदाई की आवाजें, चीखें और प्यार भरी बातें गूंज रही थीं।
“प्रिया… तुम मेरी हो… हमेशा… मैं तुम्हें कभी अकेला नहीं छोडूंगा,” विक्रम ने कहा और उसे जोर से चोदा। प्रिया झुककर उसे किस करती रही। दोनों का पसीना एक हो गया।
लंबे समय तक चुदाई चली। प्रिया कई बार झड़ गई। आखिरकार विक्रम ने उसे कसकर पकड़कर गहराई तक वीर्य उंडेल दिया। “मैं तुम्हारा हूं प्रिया… हमेशा।”
दोनों थककर लिपटे रहे। प्रिया रो रही थी — खुशी के आंसू। “तुमने मुझे औरत बना दिया… लेकिन अब डर लगता है… राजेश को क्या पता चला तो?”
विक्रम ने उसे चूमकर आश्वासन दिया, “हम संभाल लेंगे… लेकिन आज तो पूरा दिन तुम्हें चोदूंगा।”
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देवर की आग और भाभी की टूटी सील (भाग 5)
दोपहर का समय था। राजेश शाम को लौटने वाले थे। प्रिया ने विक्रम से कहा, “आज मुझे सिर्फ चोदना नहीं… मुझे प्यार से सहलाओ, पूजा करो मेरी देह की। मैं तुम्हारी पूजा बनना चाहती हूं।”
विक्रम ने मुस्कुराते हुए तेल की बोतल ली। उसने प्रिया को बेड पर पेट के बल लिटाया। प्रिया की नंगी देह बिस्तर पर फैली हुई थी — गोरी पीठ, पतली कमर, गोल नितंब। विक्रम ने तेल अपने हाथों पर लिया और धीरे-धीरे प्रिया की गर्दन से मालिश शुरू की।
“प्रिया… तुम बहुत सुंदर हो। तुम्हारी यह देह सालों से भूखी रही। आज मैं हर इंच को प्यार दूंगा,” विक्रम की आवाज गहरी और भावुक थी।
उसने प्रिया की पीठ पर तेल फैलाया। उंगलियों से दबाते हुए कंधों, रीढ़ की हड्डी और कमर को सहलाया। प्रिया की सांसें भारी हो गईं। “विक्रम… तुम्हारे हाथ… जादू कर रहे हैं। आह्ह्ह…”
विक्रम नीचे आया। उसने प्रिया के गोल-गोल नितंबों को दोनों हाथों से मसलना शुरू किया। तेल की वजह से चमकते नितंब और भी आकर्षक लग रहे थे। उसने हल्का-हल्का थपथपाया और फिर उंगलियां चूत के पास ले गया। प्रिया ने कमर उठाई। “विक्रम… अंदर… प्लीज…”
विक्रम ने उसे करवट दिलाई। अब प्रिया ऊपर थी। उसने प्रिया के पैरों से शुरू करके जांघों तक मालिश की। फिर पेट, नाभि और आखिरकार स्तनों पर पहुंचा। दोनों हाथों से भरे हुए स्तनों को धीरे-धीरे दबाया, निप्पल घुमाए। प्रिया की आंखों से आंसू निकल आए।
“मैं कितनी खुश हूं आज… तुम मुझे औरत महसूस करा रहे हो। राजेश कभी ऐसा नहीं कर पाए। मैं तुमसे सच में प्यार करने लगी हूं विक्रम… भले ही समाज इसे गलत कहे,” प्रिया भावुक होकर बोली।
विक्रम ने झुककर उसके होंठ चूमे। “मैं भी तुमसे प्यार करता हूं प्रिया। तुम मेरी भाभी नहीं… मेरी जान हो।”
अब मालिश चुदाई में बदल गई। विक्रम प्रिया के ऊपर आ गया। उसने धीरे से अपना मोटा लंड प्रिया की टाइट चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डाला। “आह्ह्ह्ह… विक्रम… भर दो मुझे… पूरी तरह…” प्रिया ने अपनी टांगें उसके कमर पर लपेट लीं।
दोनों मिशनरी पोजीशन में थे। विक्रम धीमी गति से अंदर-बाहर कर रहा था। हर धक्के के साथ प्रिया की सिसकारियां निकल रही थीं। “और गहरा… मुझे महसूस करो… मैं तुम्हारी हूं… हमेशा तुम्हारी…”
विक्रम की गति बढ़ी। वह प्रिया के स्तनों को चूसता हुआ जोर-जोर से चोदने लगा। प्रिया की उंगलियां उसकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं। दोनों पसीने से तर थे। कमरे में सिर्फ उनकी सांसें, चुदाई की आवाज और प्यार भरी बातें गूंज रही थीं।
“विक्रम… मैं झड़ने वाली हूं… साथ में आओ ना…” प्रिया चीखी। “हां प्रिया… मैं भी… आह्ह्ह्ह!!!”
दोनों एक साथ झड़ गए। विक्रम का गर्म वीर्य प्रिया की चूत में भर गया। वे देर तक एक-दूसरे से चिपके रहे। प्रिया रो रही थी — खुशी, संतोष और प्यार के आंसू।
“तुमने मुझे जिंदगी दे दी विक्रम… अब चाहे जो हो, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”
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