पहली बार में ही मेरी गुलाबी बुर फट गई उसके मोटे लंड से | first time chut fadi

पहली बार में ही मेरी गुलाबी बुर फट गई उसके मोटे लंड से

first time chut fadi

मेरा नाम नेहा है, उम्र 19 साल। मैं अभी कॉलेज की पहली साल में हूं। मेरा बॉयफ्रेंड विक्रम (24 साल) पिछले 6 महीने से मेरा साथी है। हम दोनों बहुत प्यार करते थे, लेकिन आज तक सिर्फ किसिंग और टचिंग तक ही सीमित थे। आज रात हम पहली बार सेक्स करने वाले थे।

विक्रम के घर पर कोई नहीं था। मैं शाम को उसके घर पहुंची। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। कमरे में सिर्फ हल्की लैंप की रोशनी थी। विक्रम ने मुझे अंदर बुलाया और दरवाजा बंद कर दिया।

“नेहा… तुम आज बहुत प्यारी लग रही हो,” विक्रम ने मुझे गले लगाते हुए कहा।

मैं शर्म से उसके सीने में मुंह छुपा ली और बोली, “विक्रम… मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने कभी कुछ नहीं किया। तुम्हारा लंड बहुत मोटा है, मुझे दर्द होगा ना?”

विक्रम ने मेरे बाल सहलाते हुए कहा, “डरो मत जान। मैं बहुत धीरे करूंगा। अगर दर्द हो तो तुरंत बोल देना। मैं तुम्हें प्यार करता हूं।”

हम बेड पर बैठ गए। विक्रम ने मुझे धीरे से चूमना शुरू किया। किस गहरा होता गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मैं सिहर रही थी। उसने मेरी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाला और मेरी पीठ सहलाने लगा।

धीरे-धीरे उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी। मैं अब सिर्फ ब्रा और स्कर्ट में थी। विक्रम ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। मेरे गुलाबी, भरे हुए स्तन बाहर आ गए। विक्रम ने उन्हें चूमना और चूसना शुरू कर दिया।

“आह्ह्ह… विक्रम… अच्छा लग रहा है…” मैं कराह उठी।

विक्रम ने मेरी स्कर्ट भी उतार दी। अब मैं सिर्फ हल्की सफेद पैंटी में थी। पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी। विक्रम ने पैंटी के ऊपर से मेरी गुलाबी बुर को सहलाया।

“नेहा… तुम्हारी चूत बहुत सुंदर और टाइट लग रही है,” उसने कहा।

मैंने शर्माते हुए उसकी शर्ट और पैंट उतार दी। उसका मोटा, खड़ा लंड देखकर मेरी आंखें फट गईं। “विक्रम… ये तो बहुत मोटा और लंबा है… मेरी छोटी सी बुर में कैसे जाएगा?”

विक्रम मुस्कुराया और बोला, “धीरे-धीरे जाएगा जान।”

उसने मेरी पैंटी भी उतार दी। अब मैं पूरी तरह नंगी थी। मेरी गुलाबी, कुंवारी बुर उसके सामने खुली हुई थी। विक्रम ने अपने कपड़े भी उतार दिए।

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विक्रम मेरी बुर को जीभ से चाटता है और उंगलियों से तैयार करता है, फिर लंड डालने की कोशिश करता है।

मैं बेड पर पूरी तरह नंगी लेटी हुई थी। मेरी गुलाबी, कुंवारी बुर विक्रम के सामने खुली हुई थी। विक्रम मेरे पैरों के बीच बैठ गया। उसने मेरी जांघों को प्यार से सहलाया और धीरे-धीरे फैलाया।

“नेहा… तुम्हारी बुर बहुत प्यारी और गुलाबी है,” विक्रम ने कहा और झुक गया।

उसने अपनी गर्म जीभ मेरी बुर की ऊपरी लाइन पर फेरी। मैं सिहर गई और जोर से कराही, “आआह्ह्ह… विक्रम… क्या कर रहे हो… बहुत अच्छा लग रहा है…”

विक्रम ने मेरी पूरी बुर को चाटना शुरू कर दिया। उसकी जीभ ऊपर-नीचे घूम रही थी, क्लिटोरिस पर रुककर चूस रही थी। मैं कमर उठा-उठाकर कराह रही थी। मेरे हाथ विक्रम के बालों में फंस गए थे।

“विक्रम… और करो… ahhh… मुझे बहुत मजा आ रहा है… उफ्फ…”

विक्रम ने जीभ मेरी बुर के छोटे छेद पर घुमाई और थोड़ा अंदर डालने की कोशिश की। साथ ही उसने एक उंगली मेरी बुर में धीरे से डाली। मेरी बुर बहुत टाइट थी, उंगली मुश्किल से अंदर गई।

“दर्द हो रहा है?” विक्रम ने पूछा।

“थोड़ा… लेकिन रुकना मत… जारी रखो,” मैंने सांस फूलते हुए कहा।

विक्रम ने उंगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। दूसरी उंगली भी जोड़ दी। अब वह उंगलियों से मेरी बुर को फैला रहा था और साथ-साथ जीभ से क्लिटोरिस चूस रहा था। मेरी बुर से काफी रस निकलने लगा।

मैं जोर-जोर से कराह रही थी, “विक्रम… मुझे कुछ हो रहा है… ahhhhh… मैं झड़ने वाली हूं…”

मेरा पहला ऑर्गेज्म आ गया। मेरा पूरा बदन सख्त हो गया और बुर सिकुड़ने लगी। विक्रम ने सब चाट लिया।

अब विक्रम ऊपर आ गया। उसका मोटा, खड़ा लंड मेरी जांघों से टकरा रहा था। उसने लंड को मेरी गुलाबी बुर के छेद पर रखा और धीरे से दबाव डाला।

“नेहा… अब असली दर्द आएगा। तैयार हो?” विक्रम ने पूछा।

मैंने आंखें बंद कर लीं और सिर हिला दिया। विक्रम ने धीरे-धीरे अपना मोटा लंड मेरी टाइट बुर में धकेला। लंड का सिर अंदर गया तो मुझे तेज दर्द हुआ।

“आआआह्ह्ह… विक्रम… बहुत दर्द हो रहा है… रुको… ahhh!” मैं चीखी।

विक्रम ने एक जोरदार धक्का दिया। “फट्” की आवाज के साथ उसका मोटा लंड मेरी कुंवारी गुलाबी बुर को फाड़ता हुआ आधा अंदर चला गया। खून निकलने लगा। मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे।

“विक्रम… बहुत दर्द है… निकालो प्लीज… मेरी बुर फट गई… ahhhhh!”

विक्रम ने मुझे चूमते हुए कहा, “बस थोड़ी देर सह लो नेहा… तुम्हारी बुर बहुत टाइट है… मैं प्यार से करूंगा।”

उसने धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करना शुरू किया। हर धक्के के साथ लंड और अंदर जा रहा था। दर्द के साथ अब अजीब सा मजा भी आने लगा था। मेरे चेहरे पर पसीना था, होंठ कटे हुए थे और मैं लगातार कराह रही थी।

विक्रम का चेहरा उत्तेजना से लाल था। वह धीमी गति से चोद रहा था। “नेहा… अब पूरा अंदर चला गया है… कैसा लग रहा है?”

“दर्द के साथ अच्छा भी लग रहा है… धीरे करो… ahhh… और अंदर…” मैंने कहा।

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विक्रम तेजी से मेरी बुर चोदता है और मुझे डॉगी स्टाइल में करता है।

मेरी गुलाबी बुर अब खून और रस से सन चुकी थी। विक्रम ने मुझे प्यार से चूमकर कहा, “नेहा, अब घुटनों पर हो जाओ।”

मैं दर्द सहते हुए घुटनों के बल हो गई। मेरी गोल गान्ड ऊपर थी और फटी हुई बुर पीछे से दिख रही थी। विक्रम मेरे पीछे आकर बैठ गया। उसने मेरी कमर को मजबूती से पकड़ लिया।

उसने अपना मोटा लंड मेरी बुर पर रखा और एक जोरदार धक्के से पूरा लंड अंदर ठोक दिया।

“आआआह्ह्ह्ह… विक्रम… बहुत गहरा… मेरी बुर फट गई… ahhhhh!” मैं जोर से चीखी।

विक्रम ने मेरी कमर को पकड़कर तेजी से चोदना शुरू कर दिया। अब वह पहले की तरह धीरे नहीं कर रहा था। हर धक्का तेज और गहरा था। उसके मोटे लंड की नसें मेरी बुर की दीवारों को रगड़ रही थीं।

“चुट-चुट-चुट-चुट…” कमरे में तेज आवाज गूंज रही थी। मेरी गान्ड हर धक्के पर जोर से हिल रही थी।

“विक्रम… धीरे… ahhh… बहुत तेज है… दर्द हो रहा है…” मैं कराह रही थी। मेरे आंसू तकिए पर गिर रहे थे।

लेकिन विक्रम की गति और तेज हो गई। वह पूरी ताकत से मेरी बुर में लंड ठोक रहा था। “नेहा… तुम्हारी बुर बहुत टाइट और गर्म है… मैं रुक नहीं सकता… ahhh… बहुत मजा आ रहा है!”

मेरा चेहरा लाल था, आंखें बंद थीं, मुंह खुला हुआ था और लगातार कराह निकल रही थी। दर्द अब धीरे-धीरे मजा में बदल रहा था।

“हां विक्रम… अब तेज करो… ahhh… फाड़ दो मेरी बुर… और जोर से… हां… जैसे वैसा…” मैं खुद भी कहने लगी।

विक्रम ने मेरे बालों को हल्का खींच लिया और जानवरों की तरह तेज धक्के मारने लगा। उसका पेट मेरी गान्ड से बार-बार टकरा रहा था। मेरी बुर पूरी तरह खुल चुकी थी और खून-रस का मिश्रण जांघों पर बह रहा था।

मैं पागल हो गई, “विक्रम… मुझे फिर हो रहा है… ahhhhh… मैं झड़ गई…!”

मेरी बुर सिकुड़-सिकुड़कर विक्रम के लंड को दबा रही थी। विक्रम ने आखिरी कुछ बहुत तेज और गहरे धक्के मारे और चीखते हुए बोला, “नेहा… मैं भर रहा हूं तुम्हारी बुर में…”

उसने मेरी चूत के अंदर गर्म-गर्म वीर्य की कई फुहारें छोड़ दीं।

दोनों थककर बेड पर लेट गए। विक्रम ने मुझे गले लगा लिया। मैं उसके सीने पर सिर रखकर हांफ रही थी। मेरी बुर में अभी भी जलन और दर्द था, लेकिन मन में अपार संतोष था।

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मैं विक्रम के लंड को मुंह में लेकर चूसती हूं।

हम दोनों थोड़ी देर लेटे रहे। मेरी बुर अभी भी सूजी हुई थी और हल्का-हल्का दर्द हो रहा था। विक्रम मेरे बालों में हाथ फेर रहा था। मैंने उसकी तरफ देखा और शर्माते हुए कहा, “विक्रम… अब मैं तुम्हें खुश करना चाहती हूं।”

विक्रम मुस्कुराया। मैं उसके पैरों के बीच बैठ गई। उसका मोटा लंड अभी भी आधा खड़ा था, मेरी बुर के रस और खून से सना हुआ था।

मैंने उसे हाथ में लिया। बहुत मोटा और गर्म था। मैंने धीरे से सहलाना शुरू किया। फिर झुककर लंड के सिर को होंठों से चूमा।

“उम्म्म…” विक्रम ने आह भरी।

मैंने लंड का सिर मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी। मेरे गाल अंदर-बाहर हो रहे थे। मैं आधा लंड मुंह में लेकर आगे-पीछे कर रही थी। कभी-कभी लंड को पूरी तरह बाहर निकालकर जीभ से चाटती, नसों पर चूमती और अंडकोश को मुंह में लेकर चूसती।

“slurp… slurp… ahhh…” मेरे मुंह से आवाजें निकल रही थीं।

विक्रम ने मेरे बाल पकड़कर हल्का दबाया, “नेहा… बहुत अच्छा चूस रही हो… गहरा लो जान… हां… जैसे वैसी…”

मैंने हिम्मत करके लंड को गले तक ले जाने की कोशिश की। लंड बहुत मोटा था, मेरी आंखों में पानी आ गया और गला भर गया। लेकिन मैं रुकी नहीं। जोर-जोर से चूसने लगी। विक्रम का लंड मेरे मुंह में पूरी तरह सख्त और फुला हुआ था।

“नेहा… तुम्हारा मुंह बहुत गर्म है… ahhh… तेज करो…” विक्रम कराह रहा था। उसके चेहरे पर उत्तेजना साफ दिख रही थी।

मैं एक हाथ से लंड के नीचे वाले हिस्से को सहला रही थी और मुंह से ऊपरी हिस्से को तेजी से चूस रही थी। विक्रम का लंड मेरे थूक से चमक रहा था।

करीब 8-10 मिनट तक मैं लगातार उसका लंड चूसती रही। विक्रम की सांसें तेज हो गईं। उसने मेरे सिर को पकड़कर लंड को गहरा मुंह में ठेला।

“नेहा… मैं आने वाला हूं… ahhhhh!”

विक्रम ने मेरे मुंह के अंदर गर्म वीर्य की फुहारें छोड़ दीं। मैंने जितना हो सका निगल लिया, बाकी मेरे होंठों और ठोड़ी पर गिर गया।

मैं थककर उसके पास लेट गई। विक्रम ने मुझे गले लगा लिया और बोला, “नेहा… तुम बहुत अच्छी हो। आज तुमने मुझे स्वर्ग दिखा दिया।”

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हम शावर में जाते हैं और वहां खड़े-खड़े सेक्स करते हैं।

कुछ देर आराम करने के बाद विक्रम ने मुझे उठाया और बोला, “चलो नेहा, शावर में चलते हैं। वहां और मजा करेंगे।”

मैं शर्माते हुए उसके साथ बाथरूम में चली गई। विक्रम ने शावर ऑन कर दिया। गर्म पानी हमारे नंगे बदन पर गिरने लगा। हम दोनों एक-दूसरे से चिपक गए। पानी हमारे शरीर पर बह रहा था।

विक्रम ने मुझे दीवार से सटा दिया। उसने मेरी एक टांग को अपनी कमर पर चढ़ा लिया। उसका मोटा लंड मेरी जांघों के बीच में दब रहा था।

“नेहा… तुम अभी भी बहुत टाइट हो,” विक्रम ने कहा और लंड को मेरी गुलाबी बुर पर रगड़ने लगा।

मैंने दीवार को पकड़ लिया। विक्रम ने धीरे से अपना लंड मेरी बुर में डाला। पानी की वजह से थोड़ा आसान हो गया, लेकिन फिर भी दर्द हुआ।

“आह्ह्ह… विक्रम… ahhh… धीरे…” मैं कराह उठी।

विक्रम ने पूरा लंड अंदर डाल दिया। अब वह खड़े-खड़े मुझे चोद रहा था। हर धक्के पर मेरी गान्ड दीवार से टकरा रही थी। पानी हमारे शरीर पर गिर रहा था, जिससे चुदाई और भी गर्म हो गई थी।

विक्रम ने मेरी कमर को पकड़कर तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। “चुट-चुट-चुट” की आवाज पानी की आवाज में मिल गई।

“विक्रम… बहुत तेज है… ahhh… मेरी बुर फट रही है… लेकिन मजा भी आ रहा है…” मैं कराह रही थी। मेरे स्तन उछल रहे थे।

विक्रम ने एक हाथ से मेरे स्तन मसलते हुए और दूसरे हाथ से मेरी कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगा। उसका मोटा लंड मेरी बुर में पूरी गहराई तक जा रहा था।

मैं पागल हो गई, “हां विक्रम… और तेज… फाड़ दो मेरी बुर… ahhhhh… मुझे फिर हो रहा है!”

मैं जोर से झड़ गई। मेरी टांगें कांप रही थीं। विक्रम ने भी कुछ और तेज धक्के मारे और मेरी बुर के अंदर अपना वीर्य छोड़ दिया।

हम दोनों पानी के नीचे थककर एक-दूसरे को गले लगाए खड़े रहे।

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अगले दिन सुबह फिर से चुदाई होती है

अगले दिन सुबह के 8 बजे थे। सूरज की हल्की रोशनी कमरे में आ रही थी। मैं विक्रम की बाहों में लेटी हुई थी। रात भर की चुदाई के कारण मेरी बुर में अभी भी हल्का दर्द और सूजन थी, लेकिन मन में नई चाहत जाग रही थी।

विक्रम जाग गया और मुझे चूमने लगा। उसका लंड मेरी जांघ से सटकर खड़ा हो गया।

“नेहा… सुबह-सुबह तुम्हें चोदने का मन कर रहा है,” विक्रम ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।

मैं शर्माते हुए बोली, “विक्रम… मेरी बुर अभी दर्द कर रही है… लेकिन मैं भी चाहती हूं।”

विक्रम ने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरी कमर को थोड़ा ऊपर उठाया। उसने लंड पर थूक लगाया और मेरी बुर पर रख दिया।

एक झटके में आधा लंड अंदर चला गया।

“आह्ह्ह… विक्रम… सुबह ही तेज मत करो… ahhh…” मैं कराह उठी।

विक्रम ने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। फिर उसने तेज गति पकड़ ली। सुबह की ताजगी में उसकी चुदाई और भी जोरदार थी। हर धक्के पर मेरी गान्ड हिल रही थी।

“विक्रम… और जोर से… ahhh… मेरी बुर को फाड़ दो… हां… तेज… तेज…” मैं अब खुद मांग रही थी।

विक्रम ने मुझे डॉगी स्टाइल में करके जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। उसका मोटा लंड मेरी बुर में बार-बार पूरी गहराई तक जा रहा था। मेरी बुर से फिर रस और थोड़ा खून निकल रहा था।

कुछ देर बाद उसने मुझे पलटकर मिशनरी पोजीशन में ले लिया। मेरे पैर अपने कंधों पर रखकर बहुत तेज धक्के मारने लगा।

“नेहा… तुम्हारी बुर आज और भी गर्म है… मैं रुक नहीं सकता…” विक्रम हांफ रहा था।

मैंने उसकी पीठ पर नाखून गाड़ दिए और चीखी, “हां विक्रम… भर दो मेरी बुर… ahhhhh!”

दोनों एक साथ झड़ गए। विक्रम ने मेरी बुर के अंदर गर्म वीर्य छोड़ दिया।

हम दोनों पसीने से तर होकर लेट गए। विक्रम ने मुझे चूमते हुए कहा, “नेहा, तुम अब मेरी हो। रोज ऐसे ही चुदोगी।”

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