रीतु आंटी को जमकर चोदा 2026| aunty sex story in hindi

रीतु आंटी को जमकर चोदा aunty sex story in hindi

मेरा नाम रोहन है। मैं 22 साल का कॉलेज स्टूडेंट हूँ। हम लोग मुंबई के एक छोटे से अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहते हैं। मेरे घर के सामने वाले फ्लैट में रीतु आंटी रहती हैं। उनकी उम्र 34 साल है लेकिन उनका फिगर ऐसा है कि कोई भी 24 साल की लड़की उनके आगे कुछ नहीं। ३६-२८-३८ का फिगर – बड़े-बड़े जूसी बूब्स जो ब्लाउज में बहुत टाइट और उभरे हुए लगते हैं, पतली कमर और एकदम गोल, मोटी, हिलती हुई गांड। जब वो चलती हैं तो उनकी गांड इतनी जोर से हिलती है कि देखकर लंड खड़ा हो जाता है। उनकी स्किन गोरी-चिट्टी है, लंबे काले बाल कंधों तक, और चेहरा इतना सेडक्टिव कि एक बार देख लो तो भूल नहीं सकते।

उनके पति राजेश अंकल मर्चेंट नेवी में हैं। ५-६ महीने बाहर रहते हैं। इसलिए रीतु आंटी घर पर ज्यादातर अकेली ही होती हैं। मैं उन्हें रोज देखता रहता था – बालकनी में नाइटी में, मार्केट में टाइट सलवार सूट में, या कभी साड़ी में। उनका क्लिवेज कभी-कभी इतना गहरा दिखता था कि मेरा लंड पैंट में ही हिलने लगता था। लेकिन मैं सिर्फ देखने तक ही सीमित था… अब तक।

कैसे यह सब शुरू हुआ – पूरा डिटेल और सस्पेंस के साथ:

एक गर्म-गर्म दोपहर थी। घर पर मैं अकेला था। पेरेंट्स दोनों ऑफिस गए थे। मैं अपने रूम में था, थोड़ा पोर्न देख रहा था और सोच रहा था कि आज क्या करूं। तभी मेरा मोबाइल रिंग हुआ। स्क्रीन पर नाम था – रीतु आंटी

मैंने कॉल उठाया। “हेलो आंटी, बोलिए।”

“रोहन बेटा… तुम घर पर हो ना?” उनकी आवाज में थोड़ी सी टेंशन थी। “गैस सिलेंडर खत्म हो गया है। नया लेने मार्केट जाना है लेकिन इतनी गर्मी में अकेली नहीं जा सकती। क्या तुम मुझे अपनी कार में ले चलोगे? बस थोड़ी देर के लिए।”

मेरा दिल थोड़ा तेज धड़का। “हां आंटी, बिल्कुल। मैं ५ मिनट में आ रहा हूं।”

मैं जल्दी से फ्रेश हुआ, टी-शर्ट और जींस पहना और उनके फ्लैट पर पहुंच गया। डोर बेल बजाई। डोर खुला तो… रीतु आंटी सामने खड़ी थी।

आज वो एक टाइट ब्लैक सलवार कमीज में थी। कुर्ता इतना टाइट था कि उनके बड़े-बड़े बूब्स के शेप साफ दिख रहे थे। ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिससे उनका गहरा क्लिवेज बिल्कुल साफ नजर आ रहा था। उन्होंने हल्का सा रेड लिपस्टिक लगाया था, बाल ओपन थे जो उनके बूब्स पर आके रुक रहे थे। उनकी कमर पर एक पतला बेल्ट था जो उनकी फिगर को और भी सेक्सी बना रहा था। जब वो डोर खोलने के लिए झुकी तो उनकी मोटी गांड पीछे की तरफ उभर आई।

“अंदर आओ बेटा,” वो मुस्कुराते हुए बोलीं। उनकी आवाज में एक अलग सी मिठास थी।

मैं अंदर गया। ड्राइंग रूम में एसी चल रहा था फिर भी गर्मी थी। वो मुझे सोफे पर बैठने को बोलीं और खुद मेरे सामने बैठ गईं। जब वो बैठीं तो उनकी मोटी गांड सोफे पर फैल गई और उनकी टांगें थोड़ी सी खुली हुई थीं। सलवार भी टाइट थी, इसलिए उनकी थाईज का शेप साफ दिख रहा था।

“बहुत गर्मी है आजकल,” वो बोलीं और अपने कुर्ते के कॉलर को थोड़ा खींच कर हवा अंदर लेने लगीं। इससे उनका क्लिवेज और गहरा हो गया। मेरा लंड हल्का सा खड़ा होने लगा लेकिन मैंने तुरंत नजर हटा ली।

“आंटी आप इतनी सुंदर हो… आपको कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए,” मैंने कहा।

वो थोड़ा सा हंस पड़ीं। “सुंदर? अब तो ३६ साल हो गए हैं बेटा। जवानी निकल गई।”

“नहीं आंटी,” मैंने हिम्मत करके कहा, “आप अब भी बहुत हॉट हो। सच में… आपको देखकर कोई भी लड़का पागल हो सकता है।”

वो मेरी तरफ देखती रहीं कुछ देर। फिर धीरे से बोलीं, “तुम भी बड़े हो गए हो रोहन। अब जवान हो। कोई गर्लफ्रेंड तो होगी?”

मैंने शर्मा कर कहा, “नहीं आंटी, अभी नहीं। पढ़ाई के साथ टाइम नहीं मिल पाता।”

“पढ़ाई?” वो हंस पड़ीं। “अरे बेटा, जिंदगी में मजा भी लेना चाहिए। मैं जब तुम्हारी उम्र की थी तब मैं भी बहुत मस्ती करती थी… अब तो सिर्फ यादें हैं और यह अकेलापन।”

फिर वो उठीं और मेरे पास वाले सोफे पर आ बैठ गईं। अब हम दोनों एक ही सोफे पर थे। सिर्फ एक फुट की दूरी। उनकी जांघ मेरी जांघ से टच हो रही थी। उनकी गरम सांस मेरी तरफ आ रही थी। उनकी खुशबू – मिक्स ऑफ परफ्यूम और उनकी नेचुरल बॉडी स्मेल – मुझे पागल कर रही थी।

“रोहन… मैं तुमसे एक बात पूछना चाहती हूं,” वो धीरे से बोलीं। “तुम मुझे कभी ऐसे देखते हो जैसे मैं तुम्हें देखती हूं? मतलब… स्पेशल तरीके से?”

मैंने घबरा कर कहा, “आंटी… मतलब?”

“मतलब कि जब मैं टाइट कपड़े पहनती हूं, या बालकनी में होती हूं… तुम मेरी छाती और गांड को घूरते हो क्या? मैं नोटिस करती हूं कि तुम्हारी नजर कभी-कभी मेरी चूचियों पर अटक जाती है।”

मैं लाल हो गया। “सॉरी आंटी… मैं नहीं चाहता था…”

वो मेरे हाथ पर अपना हाथ रख देती हैं। “सॉरी मत कहो बेटा। मैं भी तो इंसान हूं। मुझे भी अच्छा लगता है जब कोई हैंडसम जवान लड़का मुझे ऐसे देखता है। तुम तो बहुत हैंडसम हो… तुम्हारा बॉडी भी अच्छा है।”

वो मेरा हाथ अपनी तरफ खींच लेती हैं। अब मैं उनके बूब्स के बहुत पास था। उनके बड़े बूब्स मेरी तरफ उभर रहे थे।

“मैं अकेली हूं घर पर… तुम भी। क्या हम एक दूसरे को थोड़ा सा प्यार दे सकते हैं? कोई नहीं जानेगा। यह सिर्फ हम दोनों के बीच रहेगा।”

मेरा दिल धड़क रहा था। वो धीरे से अपना सिर मेरे कंधे पर रख देती हैं। “तुम्हें पता है रोहन… रात को मैं कभी-कभी अपने आप को टच करती हूं और सोचती हूं कि कोई जवान लड़का मुझे छू रहा है… और आज जब तुम यहां हो तो मैं कंट्रोल नहीं कर पा रही।”

अब वो अपना चेहरा उठा कर मेरी आंखों में देखती हैं। उनकी आंखों में एक तेजी थी… एक प्यास। वो अपने होंठ को बाइट करती हैं।

“क्या तुम मुझे चाहते हो रोहन? सच बताओ।”

मैं: “हां आंटी… मैं आपको बहुत पसंद करता हूं। आप बहुत हॉट हो।”

वो स्माइल करती हैं और अपना हाथ मेरी छाती पर रख देती हैं। “तो फिर आज हम दोनों अपनी इच्छा पूरी करते हैं। मैं तुम्हें एक एक्सपीरियंस्ड औरत का प्यार दूंगी… और तुम मुझे अपनी जवानी दो।”

अब वो बिल्कुल मेरे ऊपर आ गई थीं। उनके बड़े-बड़े बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे। उनकी गरम सांस मेरी होंठों के बिल्कुल पास थी। उनकी आंखों में अब सिर्फ एक ही चीज थी – चुदने की तड़प

मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और वो शायद फील भी कर रही थीं क्योंकि वो धीरे से अपनी जांघ को मेरी जांघ से रगड़ रही थीं।

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चुदाई की कहानी आगे बढ़ाता हूँ…


रीतु आंटी मेरे ऊपर झुकी हुई थीं। उनके बड़े-बड़े बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे। उनकी गरम सांस मेरी होंठों के बिल्कुल पास थी। मैंने अपनी सारी हिम्मत इकट्ठा की और अचानक उनका चेहरा अपने हाथों में लेकर उनके मुलायम होंठों पर जोरदार किस कर दिया।

पहले तो वो चौंक गईं, लेकिन अगले ही सेकंड में वो भी जंगली हो गईं। उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुंह में घुसा दी और जोर-जोर से चूसने लगीं। हम दोनों एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे, जीभ आपस में लड़ रही थी। उनकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं।

“उम्म्म्म्ह्ह्ह… रोहन…” वो सिसकते हुए बोलीं।

मैंने उनका कुर्ता ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। उन्होंने खुद हाथ ऊपर उठा दिए। कुर्ता निकल गया। अब वो सिर्फ ब्लैक ब्रा और सलवार में थीं। उनके गोरे-गोरे बूब्स ब्रा में बहुत टाइट होकर उभर रहे थे। मैंने ब्रा के हुक पीछे से खोले। ब्रा ढीली हुई और मैंने उसे आगे की तरफ खींच लिया।

दोनों बड़े-बड़े, भारी-भरे, गोल बूब्स बाहर आ गए। निप्पल्स गुलाबी और सख्त हो चुके थे। मैंने तुरंत एक बूब्स को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरा बूब्स हाथ से दबा रहा था।

“आह्ह्ह्ह… रोहन… जोर से चूस… मेरे बूब्स चूस ले… आह्ह्ह्ह…” रीतु आंटी सिर पीछे झुकाकर चीखने लगीं। उनकी आंखें बंद थीं और होंठ कांप रहे थे।

मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खींचा। सलवार नीचे खिसक गई। अब वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में थीं। पैंटी के बीचों-बीच गीला धब्बा साफ दिख रहा था। मैंने पैंटी को दोनों तरफ से पकड़कर नीचे उतार दिया।

उनकी चूत पूरी तरह नंगी हो गई। चूत के बाल हल्के-हल्के थे, होठ मोटे और गुलाबी, और बीच से चमकदार पानी बह रहा था। मैंने दो उंगलियां चूत में डालीं। वो बहुत गर्म और गीली थी।

“आह्ह्ह्ह्ह… उउउउउ… रोहन… मेरी चूत में उंगली मत डाल… सीधा अपना लंड घुसा दे… मैं मर रही हूं…” रीतु आंटी ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से खींचने लगीं।

मैंने भी अपनी टी-शर्ट और जींस उतार दी। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था। रीतु आंटी ने खुद मेरे अंडरवियर को नीचे खींचा। मेरा लंड एकदम खड़ा होकर बाहर आ गया – मोटा, लंबा और नसों से भरा हुआ।

“वाह… इतना बड़ा लंड… मेरे पति का तो इससे आधा भी नहीं है…” रीतु आंटी ने मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और ऊपर-नीचे करने लगीं। फिर उन्होंने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगीं।

“उम्म्म्म्ह्ह्ह… स्लर्प… स्लर्प…” उनकी चूसने की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

मैंने उन्हें उठाया और सोफे पर ही लिटा दिया। उनकी टांगें फैला दीं। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड उनकी चूत के ऊपर रखा।

“रोहन… अब मत टाल… चोद दे मुझे… अपनी चूत में लंड घुसा दे…” रीतु आंटी ने मेरी कमर पकड़ ली और नीचे की तरफ खींचा।

मैंने जोर लगाया। मेरा मोटा लंड उनकी गीली चूत में धीरे-धीरे घुसने लगा।

“आह्ह्ह्ह्ह्ह… मर गई… इतना मोटा… आह्ह्ह्ह्ह…” रीतु आंटी की आंखें फट गईं। उनका मुंह खुला रह गया। मैंने पूरा लंड एक ही झटके में अंदर घुसा दिया।

अब मैं जोर-जोर से चोदने लगा। सोफा हिल रहा था। उनकी भारी बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैं एक बूब्स मुंह में लेकर चूस रहा था और जोर-जोर से चोद रहा था।

“आह्ह्ह्ह… रोहन… जोर से… और जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे… आह्ह्ह्ह्ह… मम्म्म्ह्ह्ह…” रीतु आंटी के चेहरे पर दर्द और मजे का मिश्रण था। उनकी आंखें आधी बंद थीं, जीभ बाहर निकली हुई थी, और वो बार-बार सिर हिला रही थीं।

मैंने उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई से चोदने लगा। हर धक्के के साथ उनका शरीर कांप रहा था।

“उउउउउ… आह्ह्ह्ह… रोहन… मैं झड़ने वाली हूं… आह्ह्ह्ह्ह…”

कुछ देर बाद उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया और वो झड़ गईं। लेकिन मैंने रुकना नहीं था। मैंने उन्हें उल्टा कर दिया – डॉगी स्टाइल में।

अब उनकी बड़ी-बड़ी गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा।

“आह्ह्ह्ह… और मार… गांड पर थप्पड़ मार…” रीतु आंटी चीखीं।

मैंने लंड फिर से चूत में घुसाया और पीछे से जोर-जोर से चोदने लगा। एक हाथ से उनकी गांड पर थप्पड़ मार रहा था, दूसरे हाथ से उनके बाल पकड़कर खींच रहा था।

“रोहन… मैं तुम्हारी रंडी हूं… जोर से चोदो मुझे… आह्ह्ह्ह्ह… मर गई रे…” रीतु आंटी के मुंह से गंदी-गंदी बातें निकल रही थीं। उनकी आंखों से आंसू आ रहे थे, लेकिन वो और जोर से चुदने के लिए पीछे की तरफ धक्का दे रही थीं।

मैं भी पागल हो चुका था। उनकी टाइट चूत मेरे लंड को इतनी जोर से दबा रही थी कि मैं भी झड़ने वाला था।

आखिरकार मैंने जोर से एक धक्का मारा और अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म पानी उनकी चूत में भर दिया।

हम दोनों सांसें लेते हुए सोफे पर गिर पड़े। रीतु आंटी मेरे सीने पर सिर रखकर लेट गईं। उनका शरीर अभी भी हल्का-हल्का कांप रहा था।

लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई…

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अब रीतु आंटी मुझे तड़पाने वाली हैं…


हम दोनों सोफे पर सांसें लेते हुए लेटे थे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत से निकलकर बाहर था और दोनों के शरीर पसीने से तर थे। रीतु आंटी ने मेरे सीने पर सिर रखा हुआ था, लेकिन उनकी आंखों में अभी भी वो चमक थी।

अचानक उन्होंने मुझे धक्का देकर सोफे पर लिटा दिया। मैं पीठ के बल लेट गया। उन्होंने मेरे ऊपर घुटनों के बल बैठकर मेरे चेहरे की तरफ देखा और शैतानी मुस्कान के साथ बोलीं —

“अब बारी मेरी है बेटा… अब मैं तुझे चोदूंगी। और धीरे-धीरे… बहुत धीरे… तुझे तड़पाऊंगी।”

मैंने कुछ कहने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरे मुंह पर उंगली रख दी।

उन्होंने मेरे लंड को हाथ में लिया। अभी भी थोड़ा नरम था पहले झड़ने के बाद। उन्होंने उसे सहलाना शुरू किया। २-३ मिनट में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया — मोटा और सख्त।

रीतु आंटी ने मेरे ऊपर चढ़कर अपने घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने एक हाथ से अपना चूत के होठ फैलाए और दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के मुंह पर रखा।

धीरे-धीरे… बहुत धीरे… उन्होंने अपना वजन नीचे किया।

मेरा लंड उनकी गीली चूत में सरकता हुआ अंदर जाने लगा।

“आह्ह्ह्ह…” दोनों ने एक साथ सांस ली।

जब आधा लंड अंदर चला गया तो उन्होंने अचानक रुक गईं। उन्होंने मेरे चेहरे पर देखा और मुस्कुराते हुए बोलीं —

“कैसा लग रहा है रोहन? और अंदर जाना है ना? लेकिन अभी नहीं…”

उन्होंने सिर्फ आधा लंड अंदर रखा और ऊपर-नीचे हिलना शुरू किया — बहुत धीरे, सिर्फ सिर वाला हिस्सा अंदर-बाहर। मेरे लंड की नसें फड़क रही थीं।

“आंटी… पूरा अंदर डालो ना…” मैंने उनकी कमर पकड़ ली।

“श्श्श्श… चुप रहो। मैं जो कहूं वही करोगे।” उन्होंने मेरे हाथ हटाए और फिर से रुक गईं।

अब उन्होंने पूरा वजन नीचे कर दिया। मेरा पूरा लंड एक झटके में उनकी चूत में घुस गया।

“आह्ह्ह्ह्ह्ह… मम्म्म्ह्ह्ह…” रीतु आंटी की आंखें बंद हो गईं। उनके होंठ कांप रहे थे। उन्होंने कुछ सेकंड तक ऐसे ही बैठे रहे — पूरा लंड अंदर लेकर। उनकी चूत मेरे लंड को जोर से दबा रही थी।

फिर उन्होंने धीरे-धीरे ऊपर उठना शुरू किया… जब लंड का सिर्फ सिरा अंदर रह गया तो रुक गईं।

“रोहन… देखो कितना तड़प रहा है तेरा लंड मेरी चूत के लिए…” उन्होंने फिर से धीरे-धीरे नीचे आना शुरू किया।

इस बार उन्होंने और भी धीरे चुदाई की। ऊपर-नीचे… ऊपर-नीचे… लेकिन हर बार जब लंड आधा अंदर जाता, वो रुक जातीं और अपनी चूत की मसल्स से मेरे लंड को निचोड़तीं।

“उउउउउ… आंटी… मत रुको… जोर से चोदो…” मैं बिल्कुल पागल हो रहा था। मैंने उनकी कमर पकड़कर ऊपर की तरफ धक्का देने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरे हाथ पकड़कर पीछे कर दिए।

“नहीं… आज मैं कंट्रोल करूंगी। तुझे सिर्फ तड़पना है।”

उन्होंने फिर से रुककर मेरे लंड को अपनी चूत में घुमाना शुरू किया — गोल-गोल घुमाते हुए। मेरे लंड की नसें फूल रही थीं।

“आह्ह्ह्ह… रोहन तेरा लंड इतना मोटा है… मेरी चूत को फाड़ रहा है…” रीतु आंटी की आंखें आधी बंद थीं। उनके चेहरे पर मजे का नशा था। उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे सीने पर रखे और धीरे-धीरे गति बढ़ाई।

अब वो थोड़ी तेजी से ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके भारी बूब्स मेरे सामने उछल रहे थे। मैंने हाथ बढ़ाकर दोनों बूब्स पकड़ लिए और जोर से दबाने लगा।

“आह्ह्ह्ह… हां… मेरे बूब्स दबा… और जोर से…” रीतु आंटी सिर पीछे झुकाकर चीखीं।

लेकिन १०-१५ सेकंड बाद फिर रुक गईं। उन्होंने मेरे लंड को पूरी तरह अंदर लेकर बैठ गईं और हिलना बंद कर दिया।

“क्यों रुक गईं आंटी…” मैंने गिड़गिड़ाते हुए पूछा।

“क्योंकि मुझे तुझे तड़पाना है…” उन्होंने शैतानी मुस्कान के साथ जवाब दिया।

उन्होंने फिर से धीरे-धीरे चुदाई शुरू की। इस बार उन्होंने अपनी चूत को आगे-पीछे भी हिलाना शुरू किया। मेरे लंड का सिरा उनकी चूत की गहराई को छू रहा था।

“आह्ह्ह्ह… रोहन… तेरा लंड मेरी चूत के सबसे अंदर तक जा रहा है…” उनकी आवाज कांप रही थी।

मैं अब बिल्कुल कंट्रोल खो चुका था। मैंने उनकी गांड के दोनों तरफ हाथ रखे और जोर से दबाया।

“आंटी… अब और मत तड़पाओ… मुझे झड़ना है…”

“नहीं… अभी नहीं। पहले मैं झडूंगी…” रीतु आंटी ने कहा और अब उन्होंने रफ्तार बढ़ा दी।

उनके बूब्स जोर-जोर से उछल रहे थे। उनकी चूत मेरे लंड पर जोर-जोर से पटक रही थी। हर धक्के के साथ “पचक… पचक… पचक…” की आवाज आ रही थी।

“आह्ह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह… मर गई… रोहन… मैं झड़ रही हूं…” रीतु आंटी की आंखें फट गईं। उनका शरीर कांपने लगा। उन्होंने मेरे सीने पर जोर से हाथ मारते हुए जोर-जोर से चीखते हुए झड़ गईं।

लेकिन उन्होंने रुकना नहीं था। झड़ने के बाद भी वो मेरे ऊपर बैठी रहीं और धीरे-धीरे हिलती रहीं।

“अब तेरी बारी है रोहन… अंदर झड़ जा…” उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।

मैंने उनकी कमर पकड़ ली और नीचे से जोर-जोर से धक्के मारने लगा। रीतु आंटी भी मेरे साथ ताल मिला रही थीं।

आखिरकार मैं भी नहीं रुक सका।

“आंटी… मैं झड़ रहा हूं…”

“हां… अंदर ही झड़ जा… मेरी चूत में अपना पानी भर दे…”

मैंने जोर से एक धक्का मारा और अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म पानी उनकी चूत में भर दिया।

रीतु आंटी मेरे ऊपर गिर पड़ीं। दोनों के शरीर पसीने से भीग चुके थे। मेरे लंड अभी भी उनकी चूत में अंदर था।

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अगले दिन… रीतु आंटी को जमकर चोदा

पिछली रात की चुदाई के बाद रीतु आंटी और मैं दोनों सोफे पर ही नंगे लेटे रहे। थकान से दोनों बेहोश हो गए। सुबह ७ बजे के आसपास मैं उठा। रीतु आंटी अभी भी मेरे ऊपर सिर रखे सो रही थीं। उनके नंगे बूब्स मेरी छाती से सटे हुए थे। मैंने धीरे से उन्हें उठाया और अपने घर चला आया क्योंकि सुबह होने वाली थी।

अगले दिन दोपहर १ बजे…

मैं अपने रूम में लेटा था। कल रात की यादें बार-बार आ रही थीं — रीतु आंटी का चीखना, उनकी चूत की गर्माहट, उनके बूब्स का स्वाद… मेरा लंड फिर से खड़ा हो रहा था। तभी मेरा फोन vibrate हुआ।

रीतु आंटी: “रोहन… घर पर अकेला है ना? मेरे पास आ जा। दरवाजा खुला है।”

मेरा दिल तेज धड़कने लगा। मैंने जल्दी से टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने और उनके फ्लैट पर चला गया। दरवाजा हल्का सा खुला था। मैं अंदर घुसा।

रीतु आंटी किचन में थीं। आज उन्होंने सिर्फ एक पतली लाल नाइटी पहनी हुई थी। नाइटी इतनी पतली थी कि उनके निप्पल्स साफ दिख रहे थे। जब उन्होंने मुझे देखा तो मुस्कुरा दीं।

“आ गया बेटा…” उन्होंने धीरे से कहा।

मैं उनके पास गया। उन्होंने तुरंत मेरी टी-शर्ट पकड़कर ऊपर खींच ली। मैंने भी उनकी नाइटी ऊपर खींच दी। नाइटी निकलते ही उनके दोनों बड़े-बड़े बूब्स बाहर आ गए। मैंने तुरंत एक बूब्स मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा।

“आह्ह्ह्ह… रोहन… कल रात के बाद से मैं तुझे भूल नहीं पा रही…” रीतु आंटी ने मेरे बालों में हाथ फेरते हुए कहा।

मैंने उन्हें उठाकर सोफे पर लिटा दिया। उनकी नाइटी पूरी तरह निकाल दी। अब वो पूरी तरह नंगी थीं। मैंने अपनी शॉर्ट्स भी उतार दी। मेरा लंड एकदम खड़ा हो चुका था।

रीतु आंटी ने मुझे ऊपर खींचा और बोलीं — “आज सुबह से ही मेरी चूत गीली हो रही है तेरे लंड की याद में… जल्दी से अंदर डाल दे।”

मैंने उनकी टांगें फैलाईं और मेरा लंड उनकी चूत पर रखा। कल रात की चुदाई के बाद भी उनकी चूत अभी भी थोड़ी सूजी हुई थी। मैंने जोर लगाया।

“आह्ह्ह्ह्ह… उउउउउ…” रीतु आंटी की आंखें बंद हो गईं। उनका मुंह खुला रह गया।

मैंने पूरा लंड एक ही झटके में अंदर घुसा दिया।

“मर गई रे… आज तो और भी मोटा लग रहा है…” रीतु आंटी चीख पड़ीं।

मैं जोर-जोर से चोदने लगा। सोफा फिर से हिल रहा था। हर धक्के के साथ उनकी भारी बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने एक बूब्स को हाथ से दबाया और दूसरे को मुंह में लेकर चूस रहा था।

“आह्ह्ह्ह… रोहन… जोर से… मेरी चूत फाड़ दे… आह्ह्ह्ह्ह…” रीतु आंटी के चेहरे पर दर्द और मजे का मिश्रण था। उनकी आंखें आधी बंद थीं, जीभ बाहर निकली हुई थी और वो बार-बार सिर हिला रही थीं।

मैंने उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई से चोदने लगा।

“उउउउउ… आह्ह्ह्ह… रोहन… मैं झड़ने वाली हूं…” रीतु आंटी चीखीं।

उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा और वो झड़ गईं। लेकिन मैंने रुकना नहीं था। मैंने उन्हें उल्टा कर दिया — डॉगी स्टाइल में।

अब उनकी बड़ी-बड़ी गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा।

“आह्ह्ह्ह… और मार… गांड पर थप्पड़ मार…” रीतु आंटी चीखीं।

मैंने लंड फिर से चूत में घुसाया और पीछे से जोर-जोर से चोदने लगा। एक हाथ से उनके बाल पकड़कर खींच रहा था, दूसरे हाथ से उनकी गांड पर थप्पड़ मार रहा था।

“रोहन… मैं तुम्हारी रंडी हूं… जोर से चोदो मुझे… आह्ह्ह्ह्ह… मर गई रे…” रीतु आंटी के मुंह से गंदी-गंदी बातें निकल रही थीं।

मैं भी पागल हो चुका था। उनकी टाइट चूत मेरे लंड को इतनी जोर से दबा रही थी कि मैं भी झड़ने वाला था।

“आंटी… मैं झड़ रहा हूं…”

“हां… अंदर ही झड़ जा… मेरी चूत में भर दे…”

मैंने जोर से एक धक्का मारा और अंदर ही झड़ गया। गर्म पानी उनकी चूत में भर दिया।

हम दोनों फिर से सांसें लेते हुए सोफे पर गिर पड़े।

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