ऑफिस के बाथरूम में सेक्रेटरी को चोदा
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मैं 38 साल का कंपनी का सीनियर मैनेजर हूं। नाम विक्रम सिंह। मेरी सेक्रेटरी का नाम प्रिया है। उम्र 25 साल। बेहद हॉट और खूबसूरत। गोरी चमड़ी, लंबे बाल, बड़ी आंखें और शरीर ऐसा कि ऑफिस में सबकी नजरें उस पर रहतीं। वो हमेशा टाइट ब्लाउज और पेंसिल स्कर्ट पहनती थी, जिससे उसकी कमर और गांड का शेप साफ दिखता।
शुरू में सब नॉर्मल था। लेकिन धीरे-धीरे प्रिया की तरफ मेरा आकर्षण बढ़ने लगा। वो भी मुझे घूरती रहती। कई बार जब वो मेरे केबिन में आती तो जानबूझकर मेरे बहुत करीब आ जाती। उसकी खुशबू और उसकी छाती का नजारा मुझे पागल कर देता।
एक दिन शाम के 7 बजे ऑफिस में सिर्फ हम दोनों बचे थे। बाकी सब चले गए थे। प्रिया मेरे केबिन में फाइलें लेकर आई।
“सर, ये साइन करने हैं,” उसने कहा।
मैंने फाइलें लीं। कुछ साइन करते हुए मैंने सीधा सवाल किया — “प्रिया, तू मुझे इतना क्यों घूरती रहती है?”
वो शरमा गई। “सर… आप बहुत हैंडसम हो। और… और आपकी पर्सनैलिटी बहुत आकर्षक है।”
मैंने कुर्सी छोड़ी और उसके पास खड़ा हो गया। “प्रिया, तू जानती है ना कि बॉस और सेक्रेटरी के बीच ये सब गलत है?”
उसने मेरी आंखों में देखा। “सर… मुझे पता है। लेकिन मैं… मैं आपको बहुत दिनों से चाहती हूँ।”
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
“प्रिया… तू क्या बोल रही है?”
उसने आगे बढ़कर मेरे हाथ पर हाथ रखा। “सर… मैं 25 साल की हूं। और… और मैं तैयार हूं।”
मैंने केबिन का दरवाजा बंद कर दिया। “अगर मैं शुरू कर दूं तो फिर रुकूंगा नहीं।”
प्रिया ने सिर हिलाया। “हां सर… मैं तैयार हूं।”
कुछ देर बाद प्रिया बाथरूम जाने के लिए निकली। मैं भी कुछ देर बाद उसके पीछे बाथरूम की तरफ गया। जब मैं बाथरूम के पास पहुंचा तो प्रिया अंदर से बाहर निकल रही थी। हम दोनों आमने-सामने हो गए।
मैंने उसे अंदर धकेल दिया और खुद भी अंदर चला गया। मैंने अंदर से ताला लगा दिया।
अब सस्पेंस चरम पर था। ऑफिस का बाथरूम। अंदर सिर्फ हम दोनों। मेरी सेक्रेटरी प्रिया ने खुद कहा था कि वह चाहती है कि मैं उसे चोदूं — ऑफिस के बाथरूम में।
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ऑफिस बाथरूम में दीवार से टिका कर चुदाई
बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था। बाहर ऑफिस खाली था। सिर्फ हम दोनों थे।
मैंने प्रिया को बाथरूम की दीवार से टिका दिया।
मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके बटन खोले — पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा… सब खुल गए। मैंने ब्लाउज उसके कंधों से उतारा और बाथरूम के फर्श पर फेंक दिया।
अब प्रिया ऊपर से सिर्फ ब्रा में थी।
मैंने उसके पीछे हाथ डाला, ब्रा का हुक खोला और एक झटके में हुक खोल दिया। ब्रा ढीली हो गई। मैंने स्ट्रैप्स उतारे और ब्रा को बाथरूम के काउंटर पर फेंक दिया।
प्रिया की गोरी, भारी छातियां सामने आ गईं। निप्पल्स डर से सिकुड़े हुए थे।
“सर… यहां? बाथरूम में?” प्रिया ने डरते हुए कहा।
मैंने उसके स्कर्ट का जिप खोला और स्कर्ट को नीचे खिसका दिया। स्कर्ट उसके पैरों तक आ गई। प्रिया ने पैर उठाए और स्कर्ट निकाल दी। अब सिर्फ पैंटी बची थी।
मैंने पैंटी के इलास्टिक को पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे उतारा। पैंटी उसकी गोरी जांघों से सरकती हुई निकल गई। प्रिया ने पैर उठाए और पैंटी बाथरूम के फर्श पर गिरा दी।
अब प्रिया पूरी तरह नंगी बाथरूम की दीवार से टिकी हुई थी। उसकी चूत गीली हो चुकी थी।
मैंने भी अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था।
मैंने प्रिया को दीवार से और जोर से टिका दिया। एक हाथ से उसकी एक टांग उठाई और अपने कंधे पर रख दी। अब उसकी चूत मेरे सामने पूरी तरह खुल गई थी।
उसकी आंखें डर और लालसा से भरी हुई थीं। मुंह खुला हुआ। शरीर थर-थर कांप रहा था।
“सर… कोई आ गया तो…”
मैंने लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा।
पहला धक्का — आधा लंड अंदर गया। प्रिया चीख पड़ी — “आह्ह्ह सर!!! आह्ह…”
दूसरा जोरदार धक्का — पूरा लंड अंदर घुस गया।
उसका चेहरा सुख और थोड़े दर्द से बिगड़ गया था। आंखें बंद, मुंह खुला। दोनों हाथ मेरे कंधों को पकड़े हुए थे।
“आह्ह सर… इतना मोटा… आहhh…”
मैंने रफ तरीके से चोदना शुरू कर दिया। ठप ठप ठप की तेज आवाज बाथरूम में गूंज रही थी। हर धक्के में प्रिया की छातियां उछल रही थीं। पानी की टंकी की आवाज के साथ मिलकर और भी तेज लग रही थी।
मैं उसके ऊपर झुका हुआ था। दांत भींचे हुए। आंखें उसकी उछलती छातियों और चेहरे पर टिकी हुई थीं।
“ले ले प्रिया… ऑफिस के बाथरूम में तेरी चूत फाड़ रहा हूं… ले… ले मेरा लंड… आज से तू मेरी ऑफिस वाली रंडी है…”
वो बार-बार moans कर रही थी — “आहhh सर… जोर से… आहhh… कोई आ गया तो… आहhh… लेकिन… और जोर से चोदो सर…”
मैंने उसके बाल पकड़ लिए और पीछे खींचे। उसका सिर ऊपर उठ गया। अब वो सीधा मेरी तरफ देख रही थी।
8 मिनट तक जोर-जोर से चोदने के बाद प्रिया का शरीर ऐंठ गया।
“सर… आ रहा है… आहhhhh सर!!!”
उसकी चूत ने जोर से पानी छोड़ा। मैं भी रुक नहीं पाया और अंदर ही झड़ गया। गर्म माल उसकी चूत में भर दिया।
वो दीवार से टिकी हुई, सांसें बहुत तेज, शरीर कांप रहा था। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थी।
“सर… आपने मुझे बाथरूम में चोद दिया…”
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बाथरूम में डॉगी स्टाइल
प्रिया अभी भी दीवार से टिकी हुई थी। मैंने उसे घुमा दिया। अब वो मुंह के बल दीवार से टिकी हुई थी। मैंने उसके कूल्हे पीछे की तरफ खींचे और उसे डॉगी स्टाइल में कर दिया। उसकी मोटी गांड मेरी तरफ थी।
वो शरमा रही थी। उसने सिर नीचे झुका लिया।
मैं उसके पीछे खड़ा हो गया। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से अपना लंड उसकी गीली चूत पर रगड़ने लगा।
फिर मैंने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक ही बार में अंदर घुस गया।
प्रिया चीख पड़ी — “आहhh सर!!! आहhh… बहुत गहरा!!!”
मैंने रफ तरीके से चोदना शुरू कर दिया। ठप ठप ठप की तेज आवाज बाथरूम में गूंज रही थी। हर धक्के के साथ उसकी गांड लहरा रही थी।
मैंने उसके बाल पकड़ लिए और पीछे खींचे। उसका सिर ऊपर उठ गया। अब वो बाथरूम के आईने में हम दोनों को देख रही थी।
उसका चेहरा दर्द और सुख के मिश्रण से बिगड़ गया था। मुंह खुला हुआ, आंखें आधी बंद। वो बार-बार चीख रही थी — “आहhh सर… जोर से… आहhh… मेरी गांड हिल रही है… और जोर से मारो सर…” “आहhh… दर्द हो रहा है… लेकिन… चोदो मुझे… मैं आपकी ऑफिस वाली रंडी हूं…”
मैंने उसकी एक गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। थप की आवाज बाथरूम में गूंजी और लाल निशान पड़ गया। प्रिया ने और जोर से moan किया।
मैं और तेज हो गया। उसके बाल खींचे, कमर पकड़ी और जैसे पागल होकर चोद रहा था। उसकी चूत अभी भी बहुत टाइट थी।
मैं पसीने से तर हो चुका था। दांत भींचे हुए। आंखें उसकी गांड और चूत पर टिकी हुई थीं। भारी सांसें ले रहा था।
“ले ले मेरी ऑफिस वाली रंडी… तेरी चूत आज फट जाएगी… देख ले कितना मोटा लंड ले रही है तू… तेरी गांड कितनी मोटी है…”
8 मिनट तक लगातार रफ डॉगी स्टाइल चोदने के बाद प्रिया का शरीर फिर से ऐंठ गया।
“सर… फिर आ रहा है… आहhhhh सर!!!”
उसकी चूत ने जोर से पानी छोड़ा। मैं भी रुक नहीं पाया और अंदर ही झड़ गया। गर्म माल उसकी चूत में भर दिया।
वो दीवार से टिकी हुई, सांसें बहुत तेज, शरीर अभी भी हल्का-हल्का कांप रहा था। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थी।
मैंने लंड बाहर निकाला। उसकी चूत से मेरा माल बह रहा था।
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बाथरूम में मुंह से साफ करवाया
डॉगी स्टाइल चोदाई के बाद मेरा लंड अभी भी प्रिया की चूत में था। मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला। उसकी चूत से मेरा गर्म माल बह रहा था। लंड पूरा गीला, चमकदार और चिपचिपा हो गया था।
मैंने प्रिया के बाल पकड़े और उसे घुटनों के बल बिठा दिया।
“घुटनों पर बैठ जा।”
वो थकी हुई थी लेकिन मना नहीं कर रही थी। वो धीरे-धीरे घुटनों के बल बैठ गई। अब वो मेरे सामने घुटनों पर थी, ऑफिस के बाथरूम में।
मैंने अपना गीला लंड उसके होंठों के पास ले जाकर सख्ती से कहा — “अब मुंह खोल। लंड साफ कर। अपना माल और अपनी चूत का रस सब चाट के साफ कर।”
उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। आंखें नीचे झुकी हुई थीं। लेकिन उसने मुंह खोल दिया।
मैंने लंड उसके मुंह में डाल दिया।
प्रिया ने पहले तो सिर्फ सिरा चूसा। मैंने उसके बाल पकड़कर धीरे से आगे की तरफ धकेला। लंड उसके मुंह में और अंदर चला गया।
“ग्लक… ग्लक…” की आवाज बाथरूम में गूंज रही थी।
प्रिया ने जीभ से मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे लंड पर लगे अपने रस और मेरे माल को चाट-चाट के साफ कर रही थी। उसकी जीभ लंड के नीचे से ऊपर तक घूम रही थी।
मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
उसकी आंखें पानी से भर गई थीं। गाल फूल गए थे। वो कभी-कभी घुट-घुट कर खांस रही थी, लेकिन फिर भी चूस रही थी। उसके चेहरे पर साफ शर्म और अपमान का भाव था। आंखें कभी-कभी ऊपर मेरी तरफ उठतीं, फिर नीचे झुक जातीं।
मैंने उसके बाल और जोर से पकड़े और थोड़ा तेजी से उसके मुंह में चोदना शुरू कर दिया।
“अच्छे से चूस प्रिया… तेरे बॉस का लंड साफ कर… जो कुछ भी लगा है, सब मुंह में ले… ये तेरी सजा है…”
मैं नीचे देख रहा था। उसका छोटा मुंह मेरे मोटे लंड को चूस रहा था। उसके फूले हुए गाल, पानी भरी आंखें और मेरे लंड पर लगी चिपचिपाहट… ये सब देखकर मेरा लंड और सख्त हो रहा था।
“आंखें उठा के देख मुझे… अच्छे से चूस… तेरी चूत का स्वाद अब तेरे मुंह में है…”
5-6 मिनट तक प्रिया ने मेरे लंड को चूसा। उसने जीभ से अच्छे से साफ कर दिया। आखिर में मैंने लंड उसके मुंह से बाहर निकाला।
प्रिया ने खांसते हुए थूक दिया। उसके होंठ, ठोड़ी और गाल गीले हो गए थे।
वो घुटनों पर बैठी हुई, सांसें तेज, आंखें नीचे झुकी हुई। चेहरा पूरी तरह लाल। शर्म से वो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी। बस सिर झुकाए बैठी रही।
मैंने उसके बाल सहलाए और कहा — “अच्छा किया। अब उठ।”
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