सुनिता आंटी की गर्म चुदाई hot desi aunty sex story
मेरा नाम आर्यन है। उम्र 22 साल। मैं मुंबई में इंजीनियरिंग का छात्र हूँ। मेरे माता-पिता ज्यादातर समय बाहर रहते हैं। हमारे परिवार के बहुत करीबी दोस्त हैं — सुनिता आंटी। उनकी उम्र 36 साल है।
सुनिता आंटी बेहद खूबसूरत और सेक्सी हैं। गोरी चमड़ी, कंधों तक काले घने बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और मोटे होंठ। उनका शरीर कमाल का है — 36-28-38 का फिगर। छातियाँ बड़ी, भारी और भरे हुए, कमर पतली और गांड गोल-भारी। जब वो साड़ी पहनती हैं तो उनकी नाभि और ब्लाउज की गहरी दरार साफ दिखती है। उनके पति विदेश में रहते हैं और साल में सिर्फ एक-दो बार आते हैं।
कहानी की शुरूआत…
मेरे माता-पिता 12 दिन के लिए दिल्ली गए थे। उन्होंने सुनिता आंटी से कहा था कि कभी-कभी आकर देख लेना कि आर्यन अकेला तो नहीं परेशान हो रहा।
पहले दिन शाम को सुनिता आंटी मेरे घर आईं। उन्होंने गहरे नीले रंग की साड़ी पहनी थी। ब्लाउज थोड़ा टाइट और कम गला वाला था। जब वो अंदर आईं तो उनकी छातियों की गहरी दरार साफ दिख रही थी।
“आर्यन बेटा, कैसे हो? मम्मी-पापा ने कहा था ना, इसलिए आ गई। कुछ दिक्कत हो तो बता देना।”
“नहीं आंटी, सब ठीक है।”
उन्होंने रसोई में जाकर चाय बनाई। चाय लेकर आते समय जब वो झुकीं तो उनकी छातियाँ और ज्यादा बाहर आ गईं। मैं देखता रह गया।
सुनिता आंटी ने मुझे देख लिया। उन्होंने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा, “क्या देख रहे हो आर्यन? आंटी की छातियाँ अच्छी लग रही हैं क्या?”
मैं शरमा गया और बोला, “नहीं आंटी… कुछ नहीं।”
“झूठ मत बोल। मैंने देख लिया।”
उस दिन के बाद से सुनिता आंटी रोज आने लगीं। कभी खाना बनाने, कभी कपड़े धुलवाने, कभी बस बात करने।
एक दिन उन्होंने टाइट कुर्ती और लेगिंग पहनी हुई थी। कुर्ती थोड़ी छोटी थी जिससे उनकी नाभि साफ दिख रही थी। जब वो मेरे कमरे में आईं तो मैं उनकी गांड देखता रह गया।
“आर्यन, तुम मुझे बहुत घूरते हो।” उन्होंने सीधे कहा।
“आंटी… मैं…”
“कोई बात नहीं। मैं जानती हूँ तुम जवान हो। लेकिन आंटी को भी तो इंसान समझो।”
फिर उन्होंने बात शुरू की।
“मेरे पति साल में दो बार आते हैं। बाकी समय मैं अकेली रहती हूँ। कोई बात करने वाला नहीं, कोई प्यार करने वाला नहीं। बेड में भी कोई मजा नहीं आता।”
उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया।
“तुम जैसे लड़के देखकर मन करता है कि कोई मुझे छुए, कोई मुझे चोदे…”
मैं चुप रहा। मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था।
एक शाम सुनिता आंटी ने कहा, “आर्यन, आज रात मैं यहीं सो जाऊंगी। अकेले मत रहना।”
रात को हम दोनों लिविंग रूम में बैठे थे। टीवी चल रहा था। सुनिता आंटी ने पतली नाइटी पहन रखी थी। नाइटी इतनी पतली थी कि अंदर ब्रा और पैंटी की लाइन साफ दिख रही थी।
“आर्यन, मैं जानती हूँ तुम मुझे देखते हो। रोज जब मैं आती हूँ तो तुम मेरी छातियाँ और गांड घूरते हो।”
“आंटी…”
“सुनिता बोलो। आज से आंटी नहीं।”
उन्होंने मेरी तरफ झुककर कहा, “तुम्हें सुनिता आंटी की छातियाँ और गांड पसंद हैं ना?”
“हाँ… बहुत पसंद हैं।” मैंने हिम्मत करके कहा।
सुनिता आंटी मुस्कुराईं। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी एक छाती पर रख दिया।
“तो फिर आज क्या रुके हो? मम्मी-पापा 12 दिन बाद आएंगे। आज रात सुनिता तुम्हारी है।”
अब हम दोनों सोफे पर बहुत करीब बैठे थे। उनकी नाइटी का एक कंधा खिसक चुका था। एक छाती का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था।
उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ फेरा और धीरे से मेरे कान में कहा, “आर्यन… आज रात क्या करना चाहते हो? बोलो।”
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सुनिता आंटी को अपने घर में जमकर चोदा
सुनिता आंटी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में साफ लालसा थी।
उन्होंने बिना कुछ बोले मेरी पैंट का बटन खोल दिया। जिप खींची और पैंट को नीचे की तरफ खिसका दिया। अब सिर्फ अंडरवियर बचा था।
सुनिता आंटी ने मेरे अंडरवियर का इलास्टिक पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे उतार दिया।
मेरा लंड बाहर आ गया — 7 इंच लंबा, मोटा और पहले से ही खड़ा।
सुनिता आंटी ने मेरा लंड देखा और उनकी आँखें चमक उठीं।
“वाह आर्यन… इतना मोटा और हार्ड…”
उन्होंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया। उनकी हथेली गर्म थी। उन्होंने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया।
“आह्ह…” मेरे मुंह से अनजाने में आवाज निकल गई।
सुनिता आंटी मुस्कुराईं। उन्होंने लंड को और जोर से पकड़ लिया और तेजी से सहलाने लगीं।
“कितना हार्ड है… सुनिता को बहुत पसंद आ रहा है…”
मैं सोफे पर बैठा हुआ उन्हें देख रहा था। मेरे एक्सप्रेशन में साफ घबराहट और जबरदस्त एक्साइटमेंट था।
सुनिता आंटी ने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा, “आर्यन, आज रात सुनिता तुम्हारी है। जितना चाहो चोद लेना।”
मैंने हिम्मत करके उनका चेहरा दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर से किस किया।
जब हम किस कर रहे थे, तब भी सुनिता आंटी मेरा लंड सहला रही थीं।
फिर उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। शर्ट उतार दी। अब मैं पूरी तरह नंगा बैठा था।
सुनिता आंटी ने अपनी नाइटी का फीता खींचा। नाइटी उनके कंधों से नीचे सरक गई।
अब वे सिर्फ काली ब्रा और पैंटी में थीं।
मैंने उन्हें खड़ा किया और ब्रा के हुक खोले। ब्रा उतार दी।
सुनिता आंटी की नंगी छातियाँ मेरी आँखों के सामने थीं।
दोनों छातियाँ बड़ी, गोरी और भारी थीं। निप्पल सख्त खड़े थे।
मैंने एक छाती को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा।
“आआआह्ह्ह… आर्यन…” सुनिता आंटी सिसकारते हुए बोलीं। उन्होंने मेरा सिर अपनी छाती से दबा लिया।
मैंने दूसरी छाती भी चूसी। सुनिता आंटी की साँसें अब बहुत तेज हो गई थीं।
फिर मैंने उनकी पैंटी का इलास्टिक पकड़ा और नीचे उतार दिया।
अब सुनिता आंटी पूरी तरह नंगी थीं।
उनकी चूत साफ शेव की हुई थी — गुलाबी और पहले से ही गीली।
सुनिता आंटी ने मुझे सोफे पर लिटा दिया। उन्होंने मेरे ऊपर चढ़कर लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगीं।
“आआआह्ह्ह्ह…!”
लंड का सिरा उनकी चूत में घुसने लगा।
आधा लंड अंदर जाने के बाद उन्होंने रुककर सांस ली।
“बहुत मोटा है आर्यन… आह्ह…”
फिर उन्होंने और नीचे बैठना शुरू किया। पूरा लंड उनकी चूत में घुस गया।
अब सुनिता आंटी मेरे ऊपर घुड़सवार बनकर बैठी थीं।
उन्होंने हिलना शुरू किया।
“आह्ह… आह्ह… आर्यन… तुम्हारा लंड… चाची की चूत में…”
उनकी बड़ी छातियाँ मेरे सामने लटककर ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैंने दोनों हाथ बढ़ाकर उनकी छातियाँ पकड़ लीं और जोर से दबाने लगा।
सुनिता आंटी की आँखें आधी बंद थीं। मुंह खुला था। चेहरा लाल हो रहा था।
“आर्यन… और जोर से… सुनिता को चोदो… हाँ… ऐसे ही…”
मैंने भी नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए।
“पचक… पचक… पचक…”
सुनिता आंटी अब तेजी से चोद रही थीं।
“आआआह्ह्ह… आर्यन… मैं झड़ने वाली हूँ… आआआआह्ह्ह्ह्ह…!”
उनका शरीर काँपने लगा। चूत ने मेरे लंड को जोर से कस लिया।
मैं भी रुक नहीं सका।
“सुनिता… मैं भी…”
“अंदर छोड़ दो… पूरा अंदर…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और सारा माल उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
सुनिता आंटी मेरे ऊपर गिर पड़ीं। दोनों साँस लेने के लिए रुक गए।
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डॉगी स्टाइल चुदाई
सुनिता आंटी अभी भी मेरे ऊपर लेटी थीं। दोनों साँस लेने के लिए रुक गए थे।
मैंने उन्हें धीरे से उठाया और कान में फुसफुसाया, “अब पीछे से चोदता हूँ सुनिता…”
सुनिता आंटी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में अभी भी भूख थी। उन्होंने बिना कुछ बोले घुटनों के बल हो गईं। अब वे बेड पर चारों हाथ-पैरों के बल थीं।
उनकी भारी गांड मेरी तरफ उठी हुई थी। पीठ थोड़ी झुकी हुई थी और बाल एक तरफ गिर रहे थे।
मैं उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गया।
सुनिता आंटी की गांड देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। चूत अभी भी गीली थी और मेरे माल से चमक रही थी।
मैंने उनकी गांड के दोनों तरफ हाथ रखे और जोर से दबाया।
“आह्ह…” सुनिता आंटी ने सिर नीचे झुकाया।
मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा।
“आआआह्ह्ह्ह…!” सुनिता आंटी जोर से चीख पड़ीं।
पूरा लंड अंदर चला गया।
अब मैं पीछे से चोदने लगा।
हर धक्के के साथ सुनिता आंटी की भारी गांड आगे-पीछे होती थी। “पचक… पचक… पचक…” की तेज आवाज कमरे में गूंज रही थी।
सुनिता आंटी का चेहरा तकिये में दबा हुआ था। मुंह खुला था। आँखें बंद थीं।
“आह्ह… आह्ह… आर्यन… और जोर से… सुनिता की गांड मारो… हाँ…”
मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ लिया और और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए।
सुनिता आंटी की बड़ी-बड़ी छातियाँ नीचे लटककर आगे-पीछे हो रही थीं।
“आर्यन… सुनिता की चूत फट रही है… आआआह्ह्ह्ह…”
उनकी आवाज में दर्द और मजे का मिश्रण था। चेहरा लाल हो चुका था। पसीना उनकी पीठ पर चमक रहा था।
मैंने उनकी एक गांड पर जोर से थप्पड़ मारा।
“आह्ह…!” सुनिता आंटी चौंककर आगे झुक गईं।
“सुनिता… तुम्हारी गांड कितनी मोटी और सेक्सी है…” मैंने कहा।
“हाँ आर्यन… सुनिता की गांड मारो… जितना मारना है मारो…”
मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। अब सुनिता आंटी का पूरा शरीर आगे-पीछे हो रहा था।
“आह्ह… आह्ह… आआआआह्ह्ह्ह्ह… आर्यन… मैं फिर झड़ने वाली हूँ…!”
सुनिता आंटी का शरीर अचानक काँपने लगा। चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह…!”
उनकी चूत से गर्म पानी निकला और मेरी जांघों पर बहने लगा।
मैं भी रुक नहीं सका।
“सुनिता… मैं भी…”
“अंदर छोड़ दो… पूरा अंदर…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और सारा माल उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
सुनिता आंटी थककर बेड पर गिर पड़ीं। मैं भी उनके बगल में लेट गया।
दोनों साँस लेने के लिए रुक गए।
सुनिता आंटी ने पीछे हाथ बढ़ाकर मेरे चेहरे को छुआ।
“आर्यन… आज सुनिता को सच में बहुत मजा आया…”
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अगले दिन की चुदाई
रात भर की जोरदार चुदाई के बाद दोनों थककर सो गए थे।
अगले दिन सुबह 8 बजे जब मेरी आँखें खुलीं, तो सुनिता आंटी मेरे बगल में नंगी लेटी हुई थीं। उनके बाल अस्त-व्यस्त थे और शरीर पर कल रात के निशान साफ दिख रहे थे।
मैं अभी भी आधा सोया हुआ था कि सुनिता आंटी ने मेरी तरफ मुड़कर मुझे चूमा।
“जाग गए आर्यन?” उन्होंने धीरे से कहा।
“हाँ सुनिता…”
उन्होंने मेरे ऊपर चढ़कर मुझे जोर से चूमा। फिर उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया। सुबह की हार्डनेस के कारण लंड पहले से ही खड़ा था।
“आज भी सुनिता को चोदोगे?” उन्होंने शरारत से पूछा।
मैंने उन्हें पकड़कर नीचे लिटा दिया। अब मैं ऊपर था।
“हाँ… आज भी चोदूंगा।”
मैंने उनके दोनों पैर उठाकर अपने कंधों पर रख दिए और एक जोरदार धक्का मारा।
“आआआह्ह्ह…!” सुनिता आंटी जोर से चीख पड़ीं।
लंड पूरा अंदर चला गया।
अब मैं सुबह की रोशनी में उन्हें जोर-जोर से चोद रहा था।
सुनिता आंटी की छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनकी आँखें आधी बंद थीं। मुंह खुला था।
“आर्यन… सुबह-सुबह इतना जोर से… आह्ह… सुनिता की चूत फाड़ दी…”
मैंने उनकी छातियाँ दोनों हाथों से पकड़ लिया और दबाते हुए चोदता रहा।
सुनिता आंटी ने मेरी कमर को दोनों पैरों से कस लिया।
“और जोर से… हाँ… ऐसे ही… आआआह्ह्ह्ह…”
मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। बेड हिल रहा था।
सुनिता आंटी का चेहरा लाल हो चुका था। पसीना उनके माथे और छाती पर चमक रहा था।
“आर्यन… सुनिता झड़ने वाली है… आआआआह्ह्ह्ह्ह…!”
उनका शरीर काँपने लगा। चूत ने मेरे लंड को जोर से कस लिया।
मैं भी रुक नहीं सका।
“सुनिता… मैं भी…”
“अंदर छोड़ दो… पूरा…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और सारा माल उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर गए।
सुनिता आंटी ने मुझे चूमा और कहा, “आर्यन… आज पूरा दिन सुनिता तुम्हारी है। जितना चाहो चोद ले।”
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किचन में खड़े होकर चुदाई
सुबह की चुदाई के बाद सुनिता आंटी ने कहा, “चलो, नाश्ता बना देते हैं।”
दोनों अभी भी नंगे थे। सुनिता आंटी ने सिर्फ अपनी नाइटी पहन ली और मैंने भी पैंट पहन ली। हम किचन में चले गए।
सुनिता आंटी चाय बनाने लगीं। वे काउंटर के सामने खड़ी थीं। नाइटी थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी जिससे उनकी जांघें साफ दिख रही थीं।
मैं उनके पीछे आया और उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
“आर्यन… अभी नाश्ता बना रही हूँ…” उन्होंने कहा, लेकिन आवाज में हँसी थी।
मैंने उनके कान में फुसफुसाया, “सुनिता… मुझे फिर से चोदना है।”
उन्होंने पीछे मुड़कर मुझे देखा और मुस्कुराई। फिर उन्होंने नाइटी को ऊपर खींच लिया। अब उनकी गांड मेरे सामने थी।
मैंने अपनी पैंट नीचे की और लंड बाहर निकाल लिया।
सुनिता आंटी काउंटर पर झुक गईं। उन्होंने एक हाथ से चाय का बर्तन पकड़ा हुआ था।
मैंने उनका एक पैर थोड़ा सा उठाया और अपना लंड उनकी चूत पर रखा।
एक जोरदार धक्का मारा।
“आआआह्ह्ह…!” सुनिता आंटी जोर से सिसकारी मारकर आगे झुक गईं।
पूरा लंड अंदर चला गया।
अब मैं किचन में खड़े होकर उन्हें पीछे से चोद रहा था।
“पचक… पचक… पचक…”
सुनिता आंटी काउंटर से सटी हुई थीं। उनकी भारी गांड हर धक्के के साथ आगे-पीछे हो रही थी।
“आर्यन… सुबह-सुबह किचन में… आह्ह… सुनिता को चोद रहा है…”
मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ लिया और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए।
सुनिता आंटी का चेहरा काउंटर पर टिका हुआ था। आँखें बंद थीं। मुंह खुला था।
“आह्ह… आह्ह… आर्यन… और जोर से… सुनिता की चूत फाड़ दो…”
मैंने उनकी नाइटी को और ऊपर खींच लिया। अब उनकी पूरी गांड नंगी थी।
हर धक्के के साथ उनकी छातियाँ काउंटर से रगड़ खा रही थीं।
“आर्यन… बहुत अच्छा लग रहा है… हाँ… ऐसे ही चोदो…”
मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। किचन में सिर्फ हमारी साँसें और चुदाई की आवाज गूंज रही थी।
सुनिता आंटी का शरीर काँपने लगा।
“आर्यन… मैं झड़ने वाली हूँ… आआआआह्ह्ह्ह्ह…!”
उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से कस लिया।
मैं भी रुक नहीं सका।
“सुनिता… मैं भी…”
“अंदर छोड़ दो… पूरा…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और सारा माल उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
सुनिता आंटी काउंटर से सटी हुई साँस ले रही थीं।
मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनके कान में कहा, “सुनिता… आज पूरा दिन तुम्हारी चूत चोदनी है।”
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दिन में घर चली गई, रात में चुदाई
सुबह किचन में जोरदार चुदाई के बाद सुनिता आंटी ने मुझे चूमा और कहा, “आर्यन, मैं अभी घर जाकर थोड़ा काम निपटा लूँ। रात को आ जाऊंगी।”
दोपहर तक वो अपने घर चली गईं।
रात के करीब 10 बजे मेरे व्हाट्सएप पर मैसेज आया:
सुनिता: “दरवाजा खोलो, आ गई हूँ।”
मैंने दरवाजा खोला। सुनिता आंटी अंदर आईं। उन्होंने काली रंग की बहुत ही सेक्सी नाइटी पहनी थी — इतनी पतली कि अंदर कुछ भी छुपा नहीं था। बाल खुले हुए थे और होंठों पर हल्का सा लिपस्टिक लगाया था।
“रात भर तुम्हारे साथ रहूंगी…” उन्होंने धीरे से कहा।
मैंने दरवाजा बंद किया और उन्हें जोर से पकड़ लिया।
हम दोनों सीधे बेडरूम में चले गए।
सुनिता आंटी ने मुझे बेड पर धकेल दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं।
“आज रात धीरे-धीरे चोदना… पूरा समय है।”
उन्होंने मेरी शर्ट उतारी और फिर मेरी पैंट भी उतार दी। मैं पूरी तरह नंगा हो गया।
सुनिता आंटी ने अपनी नाइटी का फीता खींचा। नाइटी उनके शरीर से नीचे गिर गई।
अब वे पूरी तरह naked थीं।
मैंने उन्हें नीचे लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया।
मैंने उनका एक पैर उठाया और धीरे-धीरे लंड उनकी चूत में घुसाया।
“आआह्ह्ह…” सुनिता आंटी सिसकारते हुए बोलीं।
अब मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। हर धक्का गहरा और मजबूत था।
सुनिता आंटी की आँखें आधी बंद थीं। मुंह खुला था।
“आर्यन… आज रात बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह…”
मैंने उनकी दोनों छातियाँ पकड़ लीं और दबाते हुए चोदता रहा।
सुनिता आंटी ने मेरी कमर को दोनों पैरों से कस लिया।
“और जोर से… हाँ… सुनिता को चोदो…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। अब बेड जोर-जोर से हिल रहा था।
सुनिता आंटी की चीखें कमरे में गूंज रही थीं।
“आआआह्ह्ह… आर्यन… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह…”
मैंने उन्हें पलट दिया — अब डॉगी स्टाइल में।
सुनिता आंटी घुटनों के बल हो गईं। मैंने पीछे से लंड घुसाया और जोर-जोर से चोदने लगा।
“पचक… पचक… पचक…”
उनकी भारी गांड हर धक्के के साथ आगे-पीछे हो रही थी।
“आर्यन… सुनिता की गांड मारो… आआआह्ह्ह्ह…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर और तेजी से धक्के मारे।
सुनिता आंटी का शरीर काँपने लगा।
“आर्यन… मैं झड़ने वाली हूँ… आआआआह्ह्ह्ह्ह…!”
उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से कस लिया।
मैं भी रुक नहीं सका।
“सुनिता… मैं भी…”
“अंदर छोड़ दो… पूरा…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और सारा माल उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
सुनिता आंटी थककर बेड पर गिर पड़ीं। मैं भी उनके बगल में लेट गया।
दोनों साँस लेने के लिए रुक गए।
सुनिता आंटी ने मुझे चूमा और कहा, “आर्यन… आज रात अभी खत्म नहीं हुई है।”
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